Rajasthan Politics: राजस्थान कांग्रेस को मिला नया प्रदेश प्रभारी, एआईसीसी ने पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को दी जिम्मेदारी
जयपुर न्यूज डेस्क। राजस्थान कांग्रेस की सियासत में साल 2018 से ही खड़ा हुआ सियासी तूफान थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच जारी सियासी वर्चस्व की लड़ाई की आंच से प्रभारी भी नहीं बच पाते हैं। लिहाजा ऐसे में पिछले दो साल में तीन प्रभारी बदल गए। साल 2020 के सियासी संकट के बाद अविनाश पांडे को प्रभारी पद गवाना पड़ा था और अब इसी साल 25 सितम्बर को हुए सियासी ड्रामे के बाद अजय माकन ने प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया था।

राजस्थान में जारी सियासी घटनाक्रम और भारत जोड़ो यात्रा के बीच राजस्थान कांग्रेस को नया प्रदेश प्रभारी भी मिल गया है। कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा को प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है। रंधावा कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य भी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रंधावा को चार दिसंबर को हो प्रदेश प्रभारी के पद पर नियुक्त कर दिया गया था। उन्होंने प्रभारी पद से इस्तीफा दे चुके अजय माकन की जगह ली है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को राजस्थान कांग्रेस के ने प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी दी है। जबकि कांग्रेस ने कुमारी शैलजा को छत्तीसगढ़ का महासचिव, शक्ति सिंह गोहिल को हरियाणा के अलावा दिल्ली का प्रभार दिया है।
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बता दे कि साल 2020 पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के पार्टी में वापसी के साथ ही 34 दिन तक चला सियासी संकट थम गया था लेकिन उनकी वापसी कुछ शर्तों के साथ हुई थी। जिसमे सचिन पायलट ने कांग्रेस आलाकमान से मांग की थी कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे को राजस्थान के प्रभारी पद से हटा देना चाहिए। उनकी इस मांग पर अमल करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अविनाश पांडे को पद से मुक्त कर दिया था। जिसके बाद यह जिम्मेदारी राहुल गांधी के विश्वसनीय लोगों में शुमार अजय माकन को दी गई थी।

लेकिन राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान में प्रवेश से पहले ही अजय माकन ने 25 सितंबर के घटनाक्रम से नाराज होकर प्रदेश प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया था। अजय माकन ने अपने पद से यह कहते हुए इस्तीफा दिया था कि जब आलाकमान के निर्देश की अवहेलना के मामले में जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है, तो नैतिक आधार पर उन्हें इस पद पर रहने का अधिकार नहीं है। उनके इस फैसले को दबाव की राजनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। विधायकों के एक गुट ने माकन पर दिल्ली से ही मन बना कर एक लाइन का प्रस्ताव पेश करने का आरोप लगाया था। जिसमें पायलट को मुख्यमंत्री बनाने जाने की बात कही थी। जिसके बाद इन विधायकों ने सीएलपी की बैठक का बहिष्कार कर दिया था। अब देखना है कि राजस्थान के नए प्रभारी के रूप में सुखजिंदर सिंह रंधावा आगामी विधासभा चुनावों को लेकर क्या रणनीति बनाती है और साथ राजस्थान कांग्रेस उठे सियासी संकट को दूर करने में कितनी मदद करते है।
