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Rajasthan Politics: सीएम गहलोत ने राज्य सरकार की योजनाओं को लेकर बीजेपी पर कसा तंज, पीएम मोदी पर किया पलटवार

 
Rajasthan Politics: सीएम गहलोत ने राज्य सरकार की योजनाओं को लेकर बीजेपी पर कसा तंज, पीएम मोदी पर किया पलटवार

जयपुर न्यूज डेस्क। राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस सरकार एक्टिव मोड पर आ गई है। इसी के चलते सीए अशोक गहलोत की बजट घोषणाओं को अमलाजामी पहनाया जा रहा है। सीएम अशोक गहलोत ने आज इंदिरा गांधी शहरी योजना की शुरूआत करते हुए बीजेपी पर तंज कसा है। मनरेगा की तर्ज पर आज प्रदेश में इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना की शुरुआत की गई है। जयपुर के संस्थापक राजा जयसिंह की मां की याद में बनी खानिया की बावड़ी से इस योजना का शुभारंभ हुआ। मुख्य कार्यक्रम आदर्श नगर स्थित अंबेडकर भवन में हुआ, जहां सीएम ने महिला श्रमिकों को जॉब कार्ड बांटे। इस दौरान सीएम अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेवड़ी बांटने के बयान पर पलटवार करते हुए जनता की सेवा को सरकार की जिम्मेदारी बताया है। 

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सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि रेवड़ियां तो जोहरी बाजार में ठेले पर बिकती हैं। यहां जनता को मुफ्त इलाज और रोजगार दिया जा रहा है, जो रेवड़ियां नहीं बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है। इस दौरान उन्होंने अपील की कि पीएम मोदी देश में प्यार, भाइचारे और विश्वास से रहने की अपील करें।  साथ ही हिंसा बर्दाश्त नहीं करने की भी बात कहें।  मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि ऐसा कहने में पीएम को दिक्कत क्या है? इस दौरान उन्होंने प्रशासन शहरों के संग अभियान में बेईमानी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की सूची तैयार कर उन्हें निलंबित और बर्खास्त करने की चेतावनी भी दी। साथ ही इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना को लेकर कई राज्यों की स्कीम की स्टडी कर उससे बेहतर योजना लांच किए जाने का दावा किया है। 

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सीएम गहलोत ने इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना को ऐतिहासिक काम बताते हुए कहा कि इस योजना की शुरुआत आदर्श नगर विधानसभा से होने के चलते, आज पूरे राजस्थान के 240 नगर पालिकाओं के अंदर आदर्श नगर विधानसभा का नाम चला गया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच है कि ऐसे फैसले करो जिससे गरीब का भला हो। यही वजह है कि कच्ची बस्तियों को बसाने, उनको नियमन करने, वहां पानी, बिजली, सड़क जैसे काम कांग्रेस के शासनकाल में ही हुए हैं।कच्ची बस्तियों को लेकर कई बार वाद-विवाद भी होता है।  लेकिन इक्का-दुक्का दलाली करने वाले या प्लॉट कब्जा करने वालों को छोड़ दें, तो कच्ची बस्तियों में वही बसता है जो मजबूर है। सरकार आने के बाद जो फैसले लिए हैं, उनमें एक अहम फैसला ये है कि जो कच्ची बस्ती नियमन से बच गई है, उनका नियमन किया जाए।