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तालाबों में फैली जलकुंभी और खरपतवार बनी समस्या, सफाई कार्यों की धीमी प्रगति पर सवाल

 
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शहर के प्रमुख जलस्रोतों में शामिल स्वरूप सागर तालाब और कुम्हारिया तालाब में जलीय खरपतवार और जलकुंभी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। करीब छह माह पहले स्वरूप सागर तालाब से डिवीडिंग मशीन की सहायता से बड़ी मात्रा में जलीय खरपतवार हटाई गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि निकाली गई यह खरपतवार आज तक तालाब के पेटे में ही पड़ी हुई है। समय पर निस्तारण न होने के कारण यह अब फिर से पर्यावरणीय समस्या का रूप ले रही है।

इसी तरह जनवरी माह में कुम्हारिया तालाब से भी जलीय खरपतवार को हटाया गया था, लेकिन वह भी अब तक पूरी तरह नष्ट नहीं की गई है। स्थिति यह है कि यह खरपतवार फिर से पानी में तैरती हुई दिखाई देने लगी है, जिससे तालाब की स्वच्छता और जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई अभियान तो समय-समय पर चलाए जाते हैं, लेकिन उसके बाद निकाले गए कचरे और खरपतवार के उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं की जाती। इसके कारण समस्या कुछ ही समय में दोबारा उत्पन्न हो जाती है।

उधर, रिंग रोड क्षेत्र में भी जलभराव और बढ़ते जलस्तर के कारण इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। यहां पानी की सतह पर बड़ी मात्रा में जलीय खरपतवार तैरती नजर आ रही है, जिससे न केवल दृश्य प्रदूषण बढ़ रहा है, बल्कि बदबू और मच्छरों की समस्या भी उत्पन्न हो रही है। आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि इससे बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तालाबों में इस प्रकार की जलीय वनस्पति का बढ़ना जल में ऑक्सीजन की मात्रा को प्रभावित करता है, जिससे जलीय जीवों पर भी संकट उत्पन्न होता है। यदि समय रहते इनका निस्तारण और रोकथाम नहीं की गई तो तालाबों का पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ सकता है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल सफाई अभियान चलाने तक ही सीमित न रहा जाए, बल्कि निकाली गई खरपतवार के निस्तारण के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। साथ ही तालाबों की नियमित निगरानी और समय-समय पर गहरी सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि इस समस्या को दोबारा उत्पन्न होने से रोका जा सके।