उदयपुर में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में बढ़ी वोटिंग, भाजपा के कब्जे वाली सीटों पर 10 से 13% तक उछाल
राजस्थान के उदयपुर जिले में पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में मतदाताओं ने पहले चरण के मतदान का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। बुधवार, 28 अक्टूबर को जिले की छह पंचायत समितियों में मतदान हुआ। इस दौरान मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला। खास बात यह रही कि पिछली बार भाजपा के प्रधान वाली दो पंचायत समितियों में मतदान प्रतिशत 10 से 13 प्रतिशत तक बढ़ने की जानकारी सामने आई है। वहीं, कांग्रेस के कब्जे वाली सायरा पंचायत समिति में भी मतदान के आंकड़ों पर सबकी नजर रही।
छह पंचायत समितियों में हुआ मतदान
दूसरे चरण में उदयपुर जिले की सायरा, कोटड़ा, सुलाव, गोगुंदा, बड़गांव और देवला पंचायत समितियों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए वोट डाले गए। इन क्षेत्रों में जिला परिषद के 14 वार्डों और पंचायत समिति के 96 वार्डों के लिए मतदान हुआ। कुल 458 मतदान केंद्रों पर 3,89,323 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के पात्र थे।मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक चला। चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया। निर्वाचन विभाग की ओर से मतदान प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।
देवला में सबसे ज्यादा मतदान
उदयपुर जिले की पंचायत समितियों में देवला में मतदान को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। दोपहर एक बजे तक यहां 52.52 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जो उस समय जिले की छह पंचायत समितियों में सबसे अधिक था। वहीं, सुलाव में भी इसी समय तक 46.19 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले थे।दोपहर बाद मतदान की रफ्तार बढ़ी और तीन बजे तक उदयपुर जिले में कुल 55.70 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अंतिम मतन प्रतिशत के आंकड़ों में भी जिले की पंचायत समितियों के बीच अंतर देखने को मिला।
भाजपा और कांग्रेस के पुराने प्रदर्शन पर नजर
इस चुनाव में पिछली बार के परिणामों के आधार पर पंचायत समितियों में मतदान प्रतिशत की तुलना की जा रही है। जिन दो सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा के प्रधान बने थे, वहां इस बार मतदान में 10 से 13 प्रतिशत तक वृद्धि होने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, कांग्रेस के कब्जे वाली सायरा पंचायत समिति में मतदान के आंकड़े भी राजनीतिक चर्चा का विषय बने हुए हैं।हालांकि, मतदान प्रतिशत बढ़ने का सीधा अर्थ किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष में माहौल बनना नहीं है। अधिक मतदान के पीछे स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशियों की सक्रियता, मतदाताओं की भागीदारी और चुनावी प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारण हो सकते हैं। किस दल को इसका लाभ मिला, यह मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
नतीजों के लिए 20 नवंबर तक इंतजार
पंचायत समिति और जिला परिषद चुनाव के नतीजे 20 नवंबर को घोषित किए जाने का कार्यक्रम है। ऐसे में दूसरे चरण के मतदान के बाद अब प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की नजर मतगणना पर रहेगी। बढ़े हुए मतदान प्रतिशत ने चुनावी मुकाबले को लेकर उत्सुकता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन अंतिम तस्वीर परिणाम आने के बाद ही साफ होगी।
