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Udaipur 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन का काम शुरू, दो साल में पूरा होगा

 
Udaipur 765 केवी ट्रांसमिशन लाइन का काम शुरू, दो साल में पूरा होगा

उदयपुर न्यूज़ डेस्क, उदयपुर के ऋषभदेव से लेकर मंदसौर तक 121 किमी लंबी 765 केवी ट्रांसमिशन बिजली लाइन का काम शुरू हो चुका है। इस प्रोजेक्ट में मंदसौर सब-स्टेशन से सिरोही सब-स्टेशन तक लाइन बिछाने के लिए 2 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इस लिंक के चालू होने से राष्ट्रीय ग्रिड की अंतर क्षेत्रीय बिजली हस्तांतरण क्षमता करीब 2.2 मेगावाट बढ़ जाएगी। उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली उपलब्ध होगीइस ट्रांसमिशन लाइन का 70% हिस्सा राजस्थान और बाकी 30% हिस्सा मध्यप्रदेश से होकर गुजरेगा। राजस्थान के उदयपुर जिले के ऋषभदेव सब-स्टेशन से भींडर, चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला, बड़ीसादड़ी, प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी से गुजरती हुई मध्यप्रदेश के नीमच जिले के जीरण होकर मल्हारगढ़ होते हुए मंदसौर सब-स्टेशन तक जाएगी। लाइन में नवीनतम तकनीकी उपकरणों, स्वचालन और डिजिटल समाधान से लेस 300 टावर लगेंगे। ऋषभदेव में नए 765 केवी सब-स्टेशन की स्थापना होगी। राजस्थान और मध्यप्रदेश राज्यों में अन्य मौजूदा सब-स्टेशन पर 765 केवी डी/सी ट्रांसमिशन लाइनें और संबंधित एक्सटेंशन कार्य शामिल हैं। पावरग्रिड कंपनी इस कार्य को 2 साल में पूरा कर देगी।

अन्य राज्यों से सस्ती और विश्वसनीय बिजली प्राप्त करने में मदद मिलेगी

उपभोक्ताओं को बिजली प्रदान करने के लिए लूप-इन-लूप-आउट (LILO) व्यवस्था मंगलवाड़ के नारायणपुरा टोल नाके के पास से गुजर रही चित्तौड़गढ़-बनासकांठा लाइन में टैप होगी। लिलो टैप से दोनों दिशाओं में बिजली प्रवाह की सुविधा के साथ उच्च वोल्टेज को स्थानीय वितरण नेटवर्क तक पहुंचाएगा।

सोलर एनर्जी को बढ़ावा
ये परियोजना भारतीय ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देगी, ताकि ग्रीन एनर्जी को राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाया जा सके, इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी। यह परियोजना भारत सरकार के वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने में एक महत्वपूर्ण कदम है। 35 साल तक मरम्मत सहित समस्त जिम्मेदारियां पावरग्रिड की ही रहेगी।

एएफआई सिस्टम से हादसे नहीं होंगे
ऑटोमेटिक फॉल्ट आइसोलेशन सिस्टम के तहत कहीं भी तार टूटने पर 100 मिली सैकंड में उस तार में बिजली बंद हो जाएगी। इससे हादसे नहीं होंगे। साथ ही फॉल्ट वाली जगह सर्च करने के लिए लोकेटर सिस्टम भी काम करेगा। फॉल्ट होने की संभावना ढूंढने के लिए भी सब-स्टेशनों पर मॉनिटर सिस्टम काम करेगा जो प्री-अलर्ट का काम करेगा।

जहां टावर लगेगा, उस खातेदार को मुआवजा, जमीन अधिग्रहित नहीं होगी

स्टील के पैरों और कोण वाले लोहे के क्रॉस और पाइपों से बने टावर लगेंगे। इनकी 75 मीटर तक की ऊंचाई होगी। दो टावर के बीच में 400 मीटर की दूरी रहेगी। इमारत, सड़क, नदी और बाधा के आधार पर दो टावर के बीच में दूरी और ऊंचाई में परिवर्तन करेंगे। टॉवर कम वजन, उच्च शक्ति, उचित अवधि, दूरी, अच्छा पवन प्रतिरोध और सामग्रियों से बने हुए है। 765 केवी टावर प्रणाली विभिन्न प्रकार के क्रॉस-आर्म को समायोजित करेगी।जहां पर भी टावर लगेगा, वहां कम से कम 25 बाय 25 मीटर जमीन की जरूरत पड़ रही है। जिसकी जमीन में टावर लगेगा, उसको नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन उस जमीन का खातेदार वही व्यक्ति रहेगा ना कि कंपनी। टावर लगने के बाद उस जमीन को वह व्यक्ति काम में ले सकेगा, ना कि कंपनी के नाम अधिग्रहण होगा। मुआवजे की राशि संबंधित जिला कलेक्टर निर्धारित करेंगे।