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मदन राठौड़ की सिफारिश पर रिश्तेदार को टिकट? मेरिट में नीचे होने के बावजूद पंकज बोराणा को मिला मौका

 
मदन राठौड़ की सिफारिश पर रिश्तेदार को टिकट? मेरिट में नीचे होने के बावजूद पंकज बोराणा को मिला मौका

उदयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के टिकट वितरण को लेकर अब पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ के रिश्तेदार बताए जा रहे शहर जिला महामंत्री पंकज बोराणा को पार्टी ने वार्ड 74 से प्रत्याशी बनाया है। बताया जा रहा है कि पार्टी के आंतरिक सर्वे और तैयार किए गए पैनल में बोराणा मेरिट में नीचे थे, इसके बावजूद उन्हें टिकट मिला। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसे मदन राठौड़ की सिफारिश का नतीजा बताया जा रहा है।

मांगूसिंह रावत का टिकट काटकर बोराणा को मौका

टिकट वितरण में सबसे ज्यादा चर्चा मांगूसिंह रावत का टिकट काटे जाने को लेकर है। जानकारी के मुताबिक, वार्ड 74 से मांगूसिंह रावत का नाम पार्टी के पैनल में था। इसके बावजूद अंतिम समय में उनका टिकट काटकर पंकज बोराणा को प्रत्याशी बनाया गया।

इस फैसले के बाद पार्टी के अंदर मेरिट और सिफारिश को लेकर चर्चा तेज हो गई है। खास बात यह है कि टिकट चयन से पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ खुद कई मौकों पर सर्वे और जनता की पसंद के आधार पर उम्मीदवार चयन की बात कह चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पार्टी स्थानीय और योग्य कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगी।

700 से ज्यादा दावेदारों में हुआ था मंथन

उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए भाजपा के पास बड़ी संख्या में दावेदारों ने आवेदन किए थे। पार्टी स्तर पर करीब 700 आवेदनों पर मंथन किया गया और प्रत्येक वार्ड के लिए तीन-तीन नामों के पैनल तैयार किए गए थे। इसके बाद प्रदेश स्तर पर उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला हुआ।

ऐसे में सर्वे और पैनल की प्रक्रिया के बावजूद बोराणा को टिकट मिलने से राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है।

पार्टी के दावे और टिकट वितरण पर सवाल

निकाय चुनाव से पहले भाजपा ने उम्मीदवार चयन को लेकर स्पष्ट किया था कि पार्टी पैराशूट उम्मीदवारों से बचते हुए स्थानीय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देगी। साथ ही जनता की पसंद और कई स्तरों से मिले फीडबैक के आधार पर टिकट देने की बात कही गई थी।

अब वार्ड 74 में टिकट बदलाव के बाद इन दावों की चर्चा भी हो रही है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस टिकट को लेकर किसी तरह की आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।

उदयपुर नगर निगम के 80 वार्डों में इस बार भाजपा लगातार सातवीं बार बोर्ड बनाने का दावा कर रही है। ऐसे में टिकट वितरण के बाद सामने आ रही नाराजगी और असंतोष को साधना पार्टी नेतृत्व के लिए अहम चुनौती होगी।