Aapka Rajasthan

डंपिंग यार्ड की आग बुझाने में रोज खर्च हो रहा हजारों लीटर पानी, फायर ब्रिगेड लगा रही 20-22 फेरे; जलस्रोतों पर बढ़ा दबाव

 
डंपिंग यार्ड की आग बुझाने में रोज खर्च हो रहा हजारों लीटर पानी, फायर ब्रिगेड लगा रही 20-22 फेरे; जलस्रोतों पर बढ़ा दबाव

डंपिंग यार्ड में लगी आग अब केवल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि पानी की बर्बादी का भी बड़ा कारण बन रही है। आग पर काबू पाने के लिए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां रोजाना 20 से 22 फेरे लगा रही हैं। ऐसे में बड़ी मात्रा में पानी आग बुझाने में खर्च हो रहा है। चिंता की बात यह है कि जलस्रोतों में पानी की आवक पहले ही कम है और दूसरी तरफ उपलब्ध पानी का इस्तेमाल लगातार आग बुझाने में करना पड़ रहा है।

रोजाना 20-22 बार पहुंच रही फायर ब्रिगेड

डंपिंग यार्ड में कचरे के ढेरों में लगी आग को नियंत्रित करने के लिए दमकल विभाग की गाड़ियां लगातार काम कर रही हैं। आग की स्थिति के अनुसार उन्हें बार-बार पानी भरकर मौके पर पहुंचना पड़ रहा है। रोजाना 20 से 22 फेरे लगाने से पानी की खपत भी बढ़ रही है।

कचरे के ढेरों में आग बुझाना आसान नहीं होता। कई बार ऊपर से आग बुझने के बाद अंदर सुलगता कचरा दोबारा धुआं और लपटें पैदा करने लगता है। ऐसे में दमकलकर्मियों को लगातार पानी डालना पड़ता है।

जलस्रोतों में पहले ही कम है पानी की आवक

एक तरफ डंपिंग यार्ड की आग बुझाने के लिए बड़ी मात्रा में पानी खर्च हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ जलस्रोतों में पानी की आवक पहले से कम है। ऐसे हालात में आग बुझाने के लिए रोजाना हो रही पानी की खपत चिंता बढ़ा रही है।

स्थायी समाधान की जरूरत

डंपिंग यार्ड में बार-बार आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण और आग पर समय रहते नियंत्रण की व्यवस्था जरूरी है। केवल दमकल की गाड़ियों से आग बुझाने की कोशिश करने से पानी और संसाधनों पर लगातार दबाव बना रहेगा। इसके लिए आग लगने के कारणों की पहचान, नियमित निगरानी और कचरे के उचित प्रबंधन की जरूरत है।