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गोसेवा से शुरू हुई पहल बनी गौशाला का आधार, युवाओं ने लंपी वायरस के समय लिया बड़ा संकल्प

 
गोसेवा से शुरू हुई पहल बनी गौशाला का आधार, युवाओं ने लंपी वायरस के समय लिया बड़ा संकल्प

लगभग पांच वर्ष पहले परशुराम चौराहा क्षेत्र के कुछ युवाओं द्वारा शुरू की गई गोसेवा की एक छोटी सी पहल आज एक बड़ी सामाजिक सेवा में बदल गई है। शुरुआत में यह कार्य केवल सड़क पर घायल और बीमार गायों की मदद तक सीमित था, लेकिन समय के साथ इस प्रयास ने संगठित रूप ले लिया और अब यह एक गौशाला स्थापना की दिशा तक पहुंच चुका है।

इस पहल से जुड़े हार्दिक मेनारिया ने बताया कि शुरुआती दिनों में वे और उनके साथी नियमित रूप से सड़कों पर घायल और बीमार गायों को देखकर उनकी सेवा करते थे। कई बार रात-दिन बिना किसी संसाधन के केवल मानवीय भावना के आधार पर पशुओं की मदद की जाती थी। धीरे-धीरे यह कार्य स्थानीय लोगों के बीच पहचान बनाने लगा।

उन्होंने बताया कि इस अभियान में सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया जब लंपी वायरस के प्रकोप के दौरान बलीचा स्थित कृषि मंडी में नगर निगम द्वारा लगाए गए राहत कैंप में सेवा कार्य के लिए पहुंचे। वहां उन्होंने कई गायों को गंभीर हालत में तड़पते हुए देखा। यह दृश्य उनके लिए बेहद भावुक और प्रेरणादायक साबित हुआ।

इसी अनुभव ने उन्हें एक स्थायी समाधान की ओर सोचने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद युवाओं ने मिलकर यह निर्णय लिया कि केवल अस्थायी सहायता के बजाय एक स्थायी गौशाला की स्थापना की जाए, जहां घायल, बीमार और बेसहारा गायों की उचित देखभाल हो सके।

समूह के सदस्यों ने बताया कि इस कार्य में धीरे-धीरे समाज के अन्य लोग भी जुड़ते गए। स्थानीय नागरिकों और गोसेवा प्रेमियों के सहयोग से संसाधन जुटाए गए और एक संगठित संरचना तैयार की गई। गौशाला की स्थापना का उद्देश्य केवल पशु सेवा नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और देखभाल को एक स्थायी व्यवस्था देना है।

इस पहल से जुड़े युवाओं का कहना है कि गायों की सेवा उनके लिए केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक भावनात्मक और सामाजिक दायित्व है। वे आगे भी इस कार्य को और व्यापक स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल समाज में संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देती है। विशेषकर महामारी जैसे हालात में जब बड़ी संख्या में पशु प्रभावित हुए थे, तब इस प्रकार की सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुईं।

कुल मिलाकर, परशुराम चौराहा क्षेत्र के युवाओं द्वारा शुरू की गई यह गोसेवा पहल अब एक संगठित गौशाला के रूप में आकार ले रही है, जो पशु कल्याण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है।