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उदयपुर समेत पूरे राजस्थान में 300 करोड़ रुपये से बांधों का जीर्णोद्धार और जल संरचनाओं में सुधार

 
उदयपुर समेत पूरे राजस्थान में 300 करोड़ रुपये से बांधों का जीर्णोद्धार और जल संरचनाओं में सुधार

राज्य सरकार ने जल संसाधन प्रबंधन को मजबूत बनाने और पुराने बांधों तथा जल संरचनाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत उदयपुर समेत राज्य के कई जिलों में स्थित बड़ें-छोटे बांधों तथा तालाबों के भरने की क्षमता, सilt-निकासी एवं मरम्मत कार्य किए जाएंगे, जिससे कृषि, पेयजल आपूर्ति और सूखे के दौरान जल संचयन बेहतर होगा।

राजस्थान सरकार की आर्थिक रूप से संशोधित बजट डिटेल्स (Budget 2024-25) के अनुसार, बांधों और तालाबों के पुनरुद्धार, डेसिल्टिंग (मल निकासी), जलधारण क्षमता बढ़ाने तथा आसपास के जल स्रोतों को मजबूत करने पर लगभग ₹300 करोड़ खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। यह राशि राज्य के कई क्षेत्रों में सामूहिक रूप से जल स्रोतों के विकास एवं स्थिरता को सुनिश्चित करने के कार्यों के लिए आवंटित की गई है।

सरकार का कहना है कि राजस्थान जैसे सूखाग्रस्त राज्य में जल संरक्षण और प्रबंधन आज सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पुराने बांधों में समय-समय पर जेवराती धारा (silt) जमा हो जाती है, जिससे उनकी जलधारण क्षमता कम होती चली जाती है। इस वजह से वर्षा के दौरान पानी को संचित करने की क्षमता बाधित होती है और पेयजल तथा कृषि के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पाता। ऐसे में इन बांधों की सही समय पर साफ़-सफाई, मरम्मत और जीर्णोद्धार से वर्षा संचयन क्षमता में वृद्धि होगी।

उदयपुर जिले सहित आसपास के कई इलाकों में वर्तमान में मौजूद सी बांध (Sei Dam) और मंसी वाकल बांध (Mansi Wakal Dam) जैसी जल संरचनाएँ स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत हैं, जो शहरों एवं गांवों में पीने के पानी के अलावा कृषि पानी की आपूर्ति में भी योगदान देती हैं।

सरकार ने बताया है कि इस परियोजना के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

पुराने डैम/तालाबों की सilt निकासी और क्षमता बढ़ाना।

फीडर नालों (feeder canals) तथा कनेक्टिंग नलों का जीर्णोद्धार।

जल संचयन क्षमता बढ़ाने के लिए डैम ब्रेच तथा अपस्ट्रीम डिवाइस की मरम्मत।

पेयजल तथा कृषि उपयोग के लिए जल स्रोतों का नियमित निरीक्षण और रखरखाव।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे राज्य में जहां वर्षा का पैटर्न अनियमित होता है, ऐसे में जल संरचनाओं की समय-समय पर रखरखाव योजनाएँ जल आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकती हैं और ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को विशेष सहायता प्रदान करने में सहायक हो सकती हैं।

जल संसाधन विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि इन निधियों के उपयोग से केवल ख़ुद के जल स्रोतों की स्थिति सुधरेगी ही नहीं, बल्कि इससे नदी नालों के भंडारण और वितरण प्रणाली में भी सुधार आएगा, जिससे आने वाले मानसून के समय जल स्तर बेहतर बना रहेगा।

राज्य सरकार का यह वित्तीय प्रावधान जल संरक्षण, स्थानीय और ग्रामीण गांवों की जल जरूरतों, तथा कृषि क्षेत्र की स्थिरता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिसके प्रभाव से उदयपुर और अन्य जिलों में जल उपलब्धता में सहजता बढ़ेगी और लोगों को लंबे समय तक पानी की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।