गुरु पूर्णिमा पर राजस्थान सरकार करेगी 515 संत-महंतों का सम्मान, प्रदेशभर में होंगे विशेष कार्यक्रम
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजस्थान सरकार प्रदेशभर में संतों और महंतों का सम्मान करेगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर देवस्थान विभाग की ओर से 29 जुलाई को विशेष सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम के तहत राजस्थान के सभी जिलों में करीब 515 संत-महंतों को सम्मानित किया जाएगा।
देवस्थान विभाग की ओर से आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रदेश की आध्यात्मिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़े संतों और महंतों के योगदान को सम्मान देना है। सरकार की ओर से जिला स्तर पर कार्यक्रमों की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान का विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन शिष्य अपने गुरु के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनके मार्गदर्शन को जीवन में महत्वपूर्ण स्थान देते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान सरकार ने संत समाज के सम्मान का निर्णय लिया है।
प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में स्थानीय संतों, महंतों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाएगा। सम्मान समारोह के दौरान संतों का अभिनंदन किया जाएगा और उनके धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान को याद किया जाएगा।
देवस्थान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आयोजन स्थलों पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान लंबे समय से संत परंपरा और धार्मिक विरासत के लिए जाना जाता है। प्रदेश में कई प्रसिद्ध मंदिर, मठ और धार्मिक स्थल हैं, जहां संत समाज सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में सरकार का यह आयोजन संत समाज के प्रति सम्मान और आस्था को दर्शाने वाला माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इससे पहले भी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। गुरु पूर्णिमा के मौके पर होने वाला यह आयोजन इसी दिशा में एक कदम बताया जा रहा है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय लोगों की भी भागीदारी रहने की संभावना है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर जिले में गुरु पूर्णिमा का आयोजन श्रद्धा और सम्मान के साथ किया जाए।
515 संत-महंतों के सम्मान के साथ राजस्थान सरकार गुरु-शिष्य परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत संदेश देने की तैयारी में है। यह आयोजन प्रदेश की धार्मिक संस्कृति और संत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनेगा।
