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उदयपुर में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: शहरी कॉलोनियों को साफ पानी, ग्रामीणों को मिल रहा गंदा पानी

 
उदयपुर में पेयजल व्यवस्था पर सवाल: शहरी कॉलोनियों को साफ पानी, ग्रामीणों को मिल रहा गंदा पानी

भीषण गर्मी के बीच उदयपुर जिले में पेयजल वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर जहां शहर की कई कॉलोनियों में मानसी वाकल परियोजना का साफ पानी नियमित रूप से पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर झाड़ोल सहित मानसी वाकल 52 गांव पेयजल योजना से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गंदा और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर पाइपलाइन बिछाई गई थी, पानी की टंकियां बनाई गईं और ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल पहुंचाने के लिए व्यापक ढांचा तैयार किया गया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई गांवों में या तो पानी की आपूर्ति अनियमित है या फिर जो पानी पहुंच रहा है वह पीने योग्य नहीं है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से गंदा पानी मिल रहा है, जिसमें दुर्गंध और अशुद्धता की शिकायतें आम हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। गर्मी के मौसम में जब पानी की मांग सबसे अधिक होती है, तब ऐसी समस्या लोगों की परेशानियों को और बढ़ा रही है।

वहीं दूसरी ओर शहर की कॉलोनियों में इस योजना का लाभ अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से मिल रहा है। वहां नियमित अंतराल पर साफ पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे शहरी उपभोक्ताओं को राहत है। यही अंतर ग्रामीण और शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था में असमानता को उजागर कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति योजना के प्रभावी रखरखाव और निगरानी की कमी को दर्शाती है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि अंतिम छोर तक स्वच्छ पानी नहीं पहुंच पा रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ने लगी हैं। दूषित पानी के सेवन से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है, जिससे पहले से ही गर्मी और पानी की कमी से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया है और जल्द से जल्द सुधार की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पूरी आपूर्ति प्रणाली की नियमित जांच और मरम्मत नहीं होगी, तब तक ग्रामीणों को राहत मिलना मुश्किल है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति की समीक्षा की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि संबंधित क्षेत्रों में तकनीकी टीम भेजकर समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।

इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बड़ी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से क्यों नहीं पहुंच पाता। उदयपुर की यह पेयजल असमानता व्यवस्था की गंभीर खामियों की ओर इशारा करती है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।