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उदयपुर नगर निगम के मेयर बने पारस सिंघवी: जिलाध्यक्ष से गले मिलकर फूट-फूटकर रोए; BJP-कांग्रेस को निर्दलीय पार्षदों के वोट

 
उदयपुर नगर निगम के मेयर बने पारस सिंघवी: जिलाध्यक्ष से गले मिलकर फूट-फूटकर रोए; BJP-कांग्रेस को निर्दलीय पार्षदों के वोट

उदयपुर नगर निगम के मेयर पद का चुनाव परिणाम सामने आ गया है। भाजपा के पारस सिंघवी ने मेयर पद पर जीत दर्ज की है। चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस दोनों को निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिला। परिणाम घोषित होने के बाद पारस सिंघवी भावुक नजर आए और भाजपा जिलाध्यक्ष से गले मिलकर रो पड़े।

मेयर चुनाव को लेकर उदयपुर नगर निगम में सुबह से ही राजनीतिक हलचल बनी हुई थी। भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशियों के समर्थन में पार्षदों को लामबंद किया था। मतदान के बाद मतगणना हुई और परिणाम घोषित किया गया। पारस सिंघवी के मेयर चुने जाने के बाद भाजपा खेमे में खुशी का माहौल बन गया।

जीत के बाद पारस सिंघवी भाजपा जिलाध्यक्ष से मिले। इस दौरान उन्होंने जिलाध्यक्ष को गले लगा लिया और भावुक होकर रो पड़े। मौके पर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें बधाई दी। समर्थकों ने जीत के बाद नारेबाजी भी की।

मेयर चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। भाजपा और कांग्रेस दोनों प्रत्याशियों को निर्दलीय पार्षदों के वोट मिले। ऐसे में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन ने चुनावी समीकरण को प्रभावित किया। मतदान के बाद सामने आए परिणाम ने उदयपुर नगर निगम में राजनीतिक समीकरण की तस्वीर स्पष्ट कर दी।

पारस सिंघवी के मेयर बनने के बाद अब उनके सामने नगर निगम के कामकाज को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। उदयपुर जैसे बड़े पर्यटन शहर में सफाई व्यवस्था, यातायात, सड़कों, पार्किंग, कचरा प्रबंधन, पेयजल और शहर के विकास से जुड़े कई मुद्दे नगर निगम के सामने हैं।

मेयर चुनाव के परिणाम के बाद भाजपा समर्थकों में उत्साह है। वहीं कांग्रेस खेमे में भी निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर चर्चा रही। चुनाव ने यह दिखाया कि नगर निगम की राजनीति में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

पारस सिंघवी के मेयर बनने के साथ उदयपुर नगर निगम को नया नेतृत्व मिल गया है। अब आने वाले समय में उनके कार्यकाल में शहर के विकास और नगर निगम की व्यवस्थाओं को लेकर किए जाने वाले फैसलों पर शहरवासियों की नजर रहेगी।