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उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान का सामूहिक विवाह: 51 दिव्यांग और जरूरतमंद जोड़े बने जीवनसाथी

 
उदयपुर में नारायण सेवा संस्थान का सामूहिक विवाह: 51 दिव्यांग और जरूरतमंद जोड़े बने जीवनसाथी

राजस्थान के Udaipur में मानवता और सामाजिक सहयोग की अनूठी मिसाल देखने को मिली। यहां Narayan Seva Sansthan द्वारा आयोजित 45वें नि:शुल्क सामूहिक विवाह समारोह में 51 दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के जोड़े वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह बंधन में बंध गए। यह दो दिवसीय समारोह संस्थान के सेवा महातीर्थ परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश से आए सैकड़ों अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।

समारोह के दौरान वातावरण पूरी तरह उत्सव और भावनाओं से भरा हुआ था। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और मंगल ध्वनियों के बीच सभी जोड़ों का स्वागत किया गया। इसके बाद पुष्पों से सजे मंच पर वर-वधुओं ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए। इस ऐतिहासिक आयोजन में 51 वेदियों पर आचार्यों ने विवाह संस्कार संपन्न कराए।

इस सामूहिक विवाह की खास बात यह रही कि इसमें शामिल 51 जोड़ों में से 25 दिव्यांग और 26 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े थे। जीवन की चुनौतियों का सामना कर रहे इन युवक-युवतियों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर नए जीवन की शुरुआत की। कई जोड़े ऐसे भी थे, जिन्हें पहले संस्थान से नि:शुल्क सर्जरी, कृत्रिम अंग, कैलिपर्स या पुनर्वास सेवाएं मिल चुकी हैं। इन सेवाओं ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने में मदद की।

विवाह समारोह के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। शिव-पार्वती और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह पर आधारित नृत्य-नाटिकाओं ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। मेहंदी, हल्दी और महिला संगीत जैसे पारंपरिक कार्यक्रमों के बीच यह आयोजन एक बड़े पारिवारिक उत्सव जैसा नजर आया। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 700 मेहमान और दानदाता भी मौजूद रहे।

संस्थान की ओर से नवदंपतियों को नए जीवन की शुरुआत के लिए जरूरी घरेलू सामान भी दिया गया। प्रत्येक जोड़े को पलंग, बिस्तर, अलमारी, बर्तन, गैस चूल्हा, डिनर सेट, पंखा और अन्य आवश्यक सामग्री भेंट की गई, ताकि वे आत्मनिर्भर होकर अपनी गृहस्थी की शुरुआत कर सकें। इसके अलावा कई अतिथियों और दानदाताओं ने भी मंगलसूत्र, चूड़ियां, पायल और अन्य पारंपरिक उपहार देकर नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।

संस्थान के संस्थापक पद्मश्री कैलाश ‘मानव’ अग्रवाल और अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल विवाह कराना नहीं, बल्कि दिव्यांग और जरूरतमंद लोगों को सम्मान और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि जब समाज सेवा और संवेदना की भावना से आगे बढ़ता है, तभी एक समरस और सशक्त समाज का निर्माण संभव होता है।

गौरतलब है कि 1985 में स्थापित यह संस्थान दिव्यांग और जरूरतमंद लोगों के इलाज, पुनर्वास और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए काम करता है। समय-समय पर आयोजित सामूहिक विवाह समारोहों के माध्यम से संस्था हजारों जरूरतमंद जोड़ों का घर बसा चुकी है।

इस भव्य आयोजन के अंत में नववधुओं की प्रतीकात्मक डोली विदाई का भावुक दृश्य देखने को मिला। खुशी और भावनाओं से भरे इस पल में सभी उपस्थित लोगों ने नवदंपतियों के सुखद और सफल वैवाहिक जीवन की कामना की।