जयसमंद सेंचुरी: लेपर्ड हमलों से पशुधन को सबसे ज्यादा नुकसान, मुआवजा राशि कम होने का आरोप
उदयपुर स्थित जयसमंद सेंचुरी क्षेत्र में हाल ही में किए गए एक शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिसर्च के अनुसार इस क्षेत्र में तेंदुए (लेपर्ड) के हमलों से सबसे अधिक नुकसान ग्रामीणों के पशुधन को हुआ है। हालांकि, प्रभावित ग्रामीणों को मिलने वाला मुआवजा वास्तविक नुकसान की तुलना में काफी कम बताया गया है।
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि सेंचुरी क्षेत्र और उसके आसपास के गांवों में लेपर्ड के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। इनमें गाय, बकरी और अन्य पालतू पशुओं को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि वन्यजीव हमलों के बाद मुआवजा प्रक्रिया काफी धीमी और जटिल होती है। कई बार सर्वे और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने तक नुकसान की भरपाई में देरी हो जाती है। इसके अलावा, जो राशि दी जाती है वह वास्तविक बाजार मूल्य और आर्थिक क्षति से कम होती है, जिससे पीड़ित परिवारों को पूरा राहत नहीं मिल पाती।
रिसर्च रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुख्य कारण जंगलों के आसपास बढ़ती मानव गतिविधि, चारागाह की कमी और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बदलाव हो सकता है। इसके चलते तेंदुए अक्सर रिहायशी इलाकों और पशु बाड़ों की ओर रुख करते हैं।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए और प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि नुकसान की भरपाई समय पर हो सके। साथ ही, उन्होंने जंगल और गांवों के बीच सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की भी अपील की है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए लगातार निगरानी और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने और पशुधन की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जंगलों के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका और वन्यजीव प्रबंधन के बीच संतुलन नहीं बनाया जाएगा, तब तक ऐसे संघर्षों में कमी लाना मुश्किल होगा।
