डांडिया में फिल्मी गानों पर रहेगी रोक, सिर्फ मां के भजनों पर होगा रास; पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य, 11 अक्टूबर से आयोजन
नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले डांडिया और गरबा कार्यक्रमों में इस बार धार्मिक और पारंपरिक माहौल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आयोजकों ने डांडिया में फिल्मी गानों पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम में प्रतिभागी केवल मां दुर्गा के भजनों पर ही रास कर सकेंगे। इसके साथ ही आयोजन में शामिल होने वालों के लिए पारंपरिक वेशभूषा पहनना भी जरूरी होगा। कार्यक्रम की शुरुआत 11 अक्टूबर से प्रस्तावित है।
फिल्मी गानों की जगह मां के भजनों पर होगा डांडिया
नवरात्रि के दौरान डांडिया और गरबा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं। आमतौर पर इन आयोजनों में पारंपरिक गरबा गीतों के साथ फिल्मी गाने भी बजाए जाते हैं। लेकिन इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं को प्राथमिकता देने के लिए केवल मां दुर्गा के भजनों पर डांडिया करने की व्यवस्था रखी गई है।
आयोजकों का उद्देश्य कार्यक्रम को भक्तिमय वातावरण में आयोजित करना और मां की आराधना के साथ पारंपरिक रास की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इस दौरान प्रतिभागियों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
पारंपरिक वेशभूषा में आना होगा
कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए पारंपरिक वेशभूषा अनिवार्य की गई है। डांडिया और गरबा में आमतौर पर महिलाएं पारंपरिक चनिया-चोली तथा पुरुष केडियू, कुर्ता और अन्य पारंपरिक परिधान पहनते हैं। ऐसे परिधान आयोजन के सांस्कृतिक स्वरूप को आकर्षक बनाते हैं।
पारंपरिक कपड़ों के साथ रंग-बिरंगे डांडिया और लोक संगीत कार्यक्रम की रौनक बढ़ाते हैं। आयोजकों की ओर से तय ड्रेस कोड का पालन करना प्रतिभागियों के लिए जरूरी रहेगा। हालांकि, आयोजन स्थल और प्रवेश संबंधी अन्य नियमों की जानकारी आयोजकों से प्राप्त की जा सकती है।
11 अक्टूबर से शुरू होगा आयोजन
डांडिया कार्यक्रम 11 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। नवरात्रि के दौरान धार्मिक आयोजनों, भजन-कीर्तन और सामूहिक गरबा-रास के माध्यम से भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हैं। ऐसे कार्यक्रमों में परिवारों और युवाओं की भागीदारी भी रहती है।
इस बार फिल्मी गानों पर रोक और पारंपरिक वेशभूषा की अनिवार्यता के चलते आयोजन का स्वरूप धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर केंद्रित रहेगा। प्रतिभागियों को कार्यक्रम में आने से पहले नियमों और समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।
धार्मिक परंपरा और संस्कृति पर रहेगा जोर
डांडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि नवरात्रि से जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा का भी हिस्सा है। मां के भजनों पर रास करने से कार्यक्रम में भक्ति का माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, पारंपरिक वेशभूषा के जरिए लोक संस्कृति को प्रोत्साहित किया जाएगा।
आयोजन स्थल, आयोजक संस्था और प्रवेश संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर कार्यक्रम में भाग लेने वाले लोगों को अपनी तैयारी करने में आसानी होगी।
