उदयपुर में 39 वार्डों में BJP-कांग्रेस की सीधी टक्कर: दोनों दलों के 13 बागी भी मैदान में, वार्डवार जानिए मुकाबला
नगर निकाय चुनाव में नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी तस्वीर साफ हो गई है। उदयपुर के वार्डों में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच देखने को मिलेगा। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, शहर के 39 वार्डों में BJP और कांग्रेस के प्रत्याशी सीधे आमने-सामने हैं।
हालांकि दोनों प्रमुख दलों के लिए चुनाव पूरी तरह आसान नहीं है। टिकट वितरण के बाद नाराज हुए नेताओं और कार्यकर्ताओं में से कई ने पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनने के बजाय निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है।
दोनों पार्टियों के 13 बागी मैदान में
उदयपुर निकाय चुनाव में BJP और कांग्रेस के कुल 13 बागी प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। नाम वापसी के दौरान दोनों दलों ने अपने कुछ नाराज नेताओं को मनाकर नामांकन वापस करवाने में सफलता हासिल की, लेकिन इसके बावजूद कई बागी मैदान में डटे रहे।इन बागियों की मौजूदगी कई वार्डों में चुनावी समीकरण बिगाड़ सकती है। खासकर वे उम्मीदवार जिनकी अपने इलाके में व्यक्तिगत पकड़ है, वे पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
39 वार्डों में सीधा मुकाबला
जिन 39 वार्डों में BJP और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, वहां चुनावी लड़ाई काफी दिलचस्प रहने वाली है। ऐसे मुकाबलों में पार्टी संगठन के साथ प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि और वार्ड में सक्रियता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।दोनों दल अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में मतदाताओं को साधने के लिए घर-घर जनसंपर्क, छोटी सभाओं और कार्यकर्ता बैठकों पर जोर देंगे।
बागियों ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता
चुनाव में बागियों की मौजूदगी BJP और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती है। कई बार पार्टी से टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरे उम्मीदवार अपने पुराने समर्थकों और स्थानीय नेटवर्क के दम पर मजबूत चुनौती पेश करते हैं।ऐसे में कुछ वार्डों में सीधा मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय भी हो सकता है। इससे जीत-हार का अंतर कम होने और वोटों के बंटवारे की संभावना बढ़ जाती है।
वार्ड के मुद्दे भी रहेंगे अहम
उदयपुर के अलग-अलग वार्डों में स्थानीय समस्याएं चुनावी मुद्दों का हिस्सा बनेंगी। सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और विकास कार्यों को लेकर प्रत्याशी मतदाताओं के बीच अपनी प्राथमिकताएं रखेंगे।मतदाता पार्टी के साथ-साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और पिछले कामकाज को भी ध्यान में रख सकते हैं।
अब प्रत्याशियों के प्रचार पर नजर
नाम वापसी के बाद अब चुनावी मैदान में बचे प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। 39 वार्डों में BJP-कांग्रेस की सीधी टक्कर और 13 बागियों की मौजूदगी ने उदपुर के चुनावी मुकाबले को खासा रोचक बना दिया है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बागी उम्मीदवार किस पार्टी के वोट बैंक को ज्यादा प्रभावित करेंगे और किन वार्डों में मुकाबले का गणित बदलेंगे।
वार्डवार कौन-कौन उम्मीदवार मैदान में हैं, इसकी जानकारी सामने आने के साथ मतदाताओं के लिए अपने क्षेत्र के मुकाबले को समझना और आसान होगा। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि उदयपुर की जनता इस बार BJP, कांग्रेस, बागी या किसी अन्य विकल्प में से किस पर भरोसा जताती है।
