मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक नहीं मानने पर सियासत तेज, कांग्रेस नेता रघुवीर सिंह मीणा बोले- "यह आदिवासियों का अपमान"
राजस्थान के ‘जलियांवाला बाग’ के नाम से प्रसिद्ध मानगढ़ धाम को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने योग्य नहीं मानने के फैसले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मुद्दे पर उदयपुर के पूर्व सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता रघुवीर सिंह मीणा ने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए इसे आदिवासी समाज का अपमान बताया है।
रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि मानगढ़ धाम केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर के आदिवासी समाज की आस्था, इतिहास और बलिदान का प्रतीक है। ऐसे ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा नहीं देना आदिवासी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला निर्णय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से भाजपा सरकार की आदिवासी हितों को लेकर वास्तविक सोच सामने आ गई है। मीणा ने कहा कि चुनाव के समय आदिवासी समाज की बात करने वाली सरकार अब उनके इतिहास और बलिदान को उचित सम्मान देने से पीछे हट रही है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मानगढ़ धाम का देश के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसे ‘आदिवासियों का जलियांवाला बाग’ कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में आदिवासी वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। ऐसे ऐतिहासिक स्थल को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलना चाहिए था।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर आदिवासी समाज के बलिदान और इतिहास को उचित सम्मान दिया जाए।
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद में एक लिखित जवाब में कहा था कि वर्तमान मानकों के आधार पर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव उपयुक्त नहीं पाया गया। इसके बाद इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है।
मानगढ़ धाम को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। कांग्रेस जहां इसे आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रही है, वहीं इस विषय पर भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
