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उदयपुर में जमीन-मकान खरीदना हुआ महंगा, DLC दरों में 49% तक बढ़ोतरी; रजिस्ट्री का खर्च बढ़ा

 
उदयपुर में जमीन-मकान खरीदना हुआ महंगा, DLC दरों में 49% तक बढ़ोतरी; रजिस्ट्री का खर्च बढ़ा

उदयपुर में जमीन और मकान खरीदना अब पहले के मुकाबले महंगा हो गया है। सरकार की ओर से हाल ही में डीएलसी (DLC) दरों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद संपत्तियों की रजिस्ट्री कराने पर लोगों को अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी। उदयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन की डीएलसी दरों में 5 फीसदी से लेकर 49 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है।

डीएलसी दर किसी क्षेत्र में जमीन या संपत्ति की सरकारी न्यूनतम दर होती है। इसी दर के आधार पर संपत्ति की रजिस्ट्री और उससे जुड़े शुल्क की गणना की जाती है। ऐसे में डीएलसी दर बढ़ने का सीधा असर जमीन और मकान खरीदने वाले लोगों की जेब पर पड़ता है।

कई इलाकों में बड़ी बढ़ोतरी

नई दरों के लागू होने के बाद उदयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में संपत्तियों की सरकारी कीमत बढ़ गई है। कुछ क्षेत्रों में डीएलसी दर में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि कई इलाकों में यह बढ़ोतरी काफी अधिक है। अधिकतम करीब 49 प्रतिशत तक की वृद्धि किए जाने से उन क्षेत्रों में जमीन खरीदने वालों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी संपत्ति की वास्तविक बिक्री कीमत और डीएलसी दर अलग-अलग हो सकती है। लेकिन रजिस्ट्री से जुड़े शुल्क और स्टांप ड्यूटी की गणना में सरकारी दरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए डीएलसी में बढ़ोतरी होने पर संपत्ति की रजिस्ट्री का कुल खर्च भी बढ़ सकता है।

खरीदारों की बढ़ सकती है परेशानी

डीएलसी दरों में वृद्धि का असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो पहली बार जमीन या मकान खरीदने की योजना बना रहे हैं। संपत्ति की कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क और अन्य खर्चों को जोड़ने पर कुल बजट पहले से अधिक हो सकता है।

वहीं, पहले से संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे लोगों में भी नई दरों को लेकर चिंता है। खरीदार अब रजिस्ट्री से पहले संबंधित क्षेत्र की नई डीएलसी दर और उस आधार पर बनने वाले शुल्क की जानकारी ले रहे हैं।

प्रॉपर्टी बाजार पर भी असर संभव

डीएलसी दरों में बढ़ोतरी का असर उदयपुर के प्रॉपर्टी बाजार पर भी पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में दरें अधिक बढ़ी हैं, वहां जमीन खरीदने वालों को अतिरिक्त बजट रखना होगा। दूसरी ओर, प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकारी दरों में बदलाव के बाद बाजार में संपत्तियों की कीमतों और लेनदेन पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।

नई डीएलसी दरों के लागू होने के बाद अब जमीन और मकान की खरीद-बिक्री करने वालों के लिए रजिस्ट्री से पहले कुल खर्च का आकलन करना जरूरी हो गया है। खासकर 49 फीसदी तक की बढ़ोतरी वाले क्षेत्रों में खरीदारों की जेब पर इसका असर अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है।