उदयपुर में भविष्य के पेयजल संकट से निपटने के लिए बड़ी पहल, देवास-III और देवास-IV परियोजनाओं को स्टेज-1 मिली मंजूरी
उदयपुर शहर में भविष्य में संभावित पेयजल संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देवास-तृतीय (Devas-III) और देवास-चतुर्थ (Devas-IV) जलापूर्ति परियोजनाओं को स्टेज-1 स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस मंजूरी के साथ उदयपुर के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की बड़ी योजना आगे बढ़ गई है।
पंजाब के राज्यपाल और उदयपुर के पूर्व सांसद गुलाबचंद कटारिया ने इस परियोजना को शहर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे आने वाले वर्षों में पानी की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि उदयपुर लगातार बढ़ते शहरीकरण और बढ़ती जनसंख्या के कारण भविष्य में पेयजल की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना कर सकता है। ऐसे में देवास परियोजनाओं का विस्तार शहर की जल-आपूर्ति प्रणाली को मजबूत करेगा।
देवास-III और देवास-IV परियोजनाएँ उदयपुर की प्रमुख जलस्रोत श्रृंखला का विस्तार मानी जा रही हैं। इन परियोजनाओं के तहत अतिरिक्त जल भंडारण, पाइपलाइन बिछाने और वितरण नेटवर्क को और प्रभावी बनाने की योजना है। स्टेज-1 स्वीकृति मिलने के बाद अब भूमि, पर्यावरणीय प्रक्रियाओं और तकनीकी डीटेलिंग से जुड़े अगले चरण शुरू हो सकेंगे।
जलदाय विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर शहर के विभिन्न इलाकों में जल आपूर्ति की क्षमता बढ़ेगी और मौजूदा दबाव कम होगा। अधिकारी बताते हैं कि मानसून अनियमित होने और मौजूदा जलस्रोतों पर दबाव बढ़ने से लंबे समय से नई जल परियोजनाओं की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
गुलाबचंद कटारिया ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसे विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजनाएँ समय पर पूरी होंगी और शहरवासियों को आने वाले वर्षों में स्थायी पेयजल व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
स्थानीय प्रशासन और नागरिक समूहों ने भी इस स्वीकृति का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह परियोजना उदयपुर के पेयजल ढांचे में एक बड़ा परिवर्तन लाएगी और गर्मियों के दौरान होने वाली पानी की कमी को भी काफी हद तक दूर करेगी।
