उदयपुर में औसत से कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, आधी से ज्यादा खाली पड़ी झीलें; इस बार फतहसागर के गेट खोलने का भी इंतजार
उदयपुर को झीलों की नगरी कहा जाता है, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण शहर की प्रमुख झीलों में पानी की कमी साफ नजर आ रही है। उदयपुर में इस मानसून औसत से भी कम बारिश होने के चलते कई झीलें आधी से ज्यादा खाली पड़ी हैं। इसका सबसे बड़ा असर फतहसागर झील पर दिखाई दे रहा है।
आमतौर पर अगस्त और सितंबर के दौरान अच्छी बारिश होने पर फतहसागर झील का जलस्तर बढ़ जाता है और इसके गेट खोलने की स्थिति बनती है। गेट खुलते ही फतहसागर का नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में शहरवासी और पर्यटक पहुंचते हैं। झील से निकलता पानी लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहता है।
लेकिन इस बार स्थिति अलग है। कम बारिश के कारण फतहसागर झील में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया। हालत यह है कि झील में आधे से भी कम पानी बताया जा रहा है। ऐसे में इस बार फतहसागर के गेट खुलने का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लगी है।
झीलों में पानी की आवक कम
मानसून के दौरान उदयपुर की झीलों में पानी की अच्छी आवक रहती है। बारिश के साथ आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों से पानी झीलों तक पहुंचता है। इस बार बारिश कम होने से झीलों में पानी की आवक भी प्रभावित हुई है। शहर की कई प्रमुख झीलों में जलस्तर सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम नजर आ रहा है।
फतहसागर के अलावा पिछोला और अन्य जलस्रोतों पर भी कम बारिश का असर देखने को मिल रहा है। झीलों का कम जलस्तर पर्यटन गतिविधियों के लिहाज से भी चिंता का विषय माना जा रहा है, क्योंकि उदयपुर की पहचान ही इसकी झीलों और इनके खूबसूरत नजारों से जुड़ी हुई है।
शहरवासियों को गेट खुलने का इंतजार
हर साल फतहसागर के गेट खुलने का लोगों को खास इंतजार रहता है। गेट खुलने पर झील का पानी छलकता हुआ नजर आता है और बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचते हैं। इस बार कम बारिश के कारण ऐसी स्थिति नहीं बन पाई है।
अब मानसून सीजन खत्म होने की ओर है और झीलों में पानी की कमी साफ दिखाई दे रही है। ऐसे में उदयपुर की झीलों के जलस्तर को लेकर शहरवासियों की नजर आने वाले मौसम और बारिश पर बनी हुई है।
