बैसाखी और कृत्रिम पैर के सहारे जिंदगी जीने वाले 50 जोड़ों ने लिए सात फेरे, उदयपुर में हुआ अनोखा सामूहिक विवाह
उदयपुर में रविवार को एक ऐसा सामूहिक विवाह समारोह आयोजित हुआ, जिसने दिव्यांगता से जुड़े नजरिए को बदलने का संदेश दिया। बड़ी स्थित 'सेवा महातीर्थ' में 50 दिव्यांग जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर सात फेरे लिए और जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। किसी ने बैसाखी के सहारे जिंदगी की मुश्किलों का सामना किया तो किसी ने कृत्रिम पैर के सहारे दोबारा चलना सीखा। विवाह मंडप में पहुंचते ही इन जोड़ों की दिव्यांगता जैसे पीछे छूट गई और उनके चेहरों पर नए जीवन की खुशी साफ दिखाई दी।
समारोह में शामिल जोड़ों के लिए यह दिन बेहद खास रहा। लंबे संघर्ष के बाद अपने जीवनसाथी के साथ नई जिंदगी की शुरुआत करने वाले इन जोड़ों ने विवाह की रस्में पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ निभाईं। परिवार के सदस्यों और समारोह में मौजूद लोगों ने भी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया।
एक-दूसरे का सहारा बने जीवनसाथी
इन विवाहों की सबसे खास बात यह रही कि यहां दिव्यांगता को कमजोरी के तौर पर नहीं, बल्कि जीवन के संघर्ष का हिस्सा मानकर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। कई जोड़ों ने अपने जीवन में कठिन परिस्थितियों का सामना किया है। किसी को चलने के लिए बैसाखी की जरूरत है तो कोई कृत्रिम अंग के सहारे रोजमर्रा की जिंदगी जी रहा है।
इसके बावजूद इन जोड़ों ने अपने जीवन में प्रेम, भरोसे और साथ को प्राथमिकता दी। सात फेरों के दौरान उन्होंने सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने का संकल्प लिया। समारोह में मौजूद लोगों ने नवविवाहित जोड़ों का उत्साह बढ़ाया और उनके नए जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
समारोह में दिखा उत्साह
'सेवा महातीर्थ' परिसर में सामूहिक विवाह को लेकर विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। विवाह की पारंपरिक रस्मों के साथ जोड़ों ने वरमाला और सात फेरे लिए। परिजन और अन्य मेहमान इस खास अवसर के साक्षी बने।
समारोह का उद्देश्य दिव्यांग लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर जीवन के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश देना भी रहा। आयोजन में यह संदेश सामने आया कि शारीरिक चुनौतियां किसी व्यक्ति के सपनों और रिश्तों के रास्ते में स्थायी बाधा नहीं बन सकतीं।
50 जोड़ों के एक साथ विवाह बंधन में बंधने का यह दृश्य मौजूद लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक रहा। किसी ने बैसाखी के सहारे मंडप तक पहुंचकर फेरे लिए तो किसी ने कृत्रिम पैर के सहारे विवाह की रस्में पूरी कीं। इन जोड़ों ने साबित किया कि जीवन की कठिनाइयों के बीच भी खुशियों की नई शुरुआत की जा सकती है।
