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लोकसभा में टोंक को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग फिर उठी, सांसद हरीश चंद्र मीना ने रखा मुद्दा

 
लोकसभा में टोंक को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग फिर उठी, सांसद हरीश चंद्र मीना ने रखा मुद्दा

राजस्थान के Tonk जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दशकों पुरानी मांग एक बार फिर संसद में गूंज उठी। टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद Harish Chandra Meena ने गुरुवार को लोकसभा में अपने क्षेत्र की इस लंबे समय से लंबित मांग को मजबूती से उठाया।

सांसद ने सदन में कहा कि टोंक जिला मुख्यालय आज भी सीधे रेल कनेक्टिविटी से वंचित है, जिससे आम जनता, व्यापारियों और विद्यार्थियों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि देश तेजी से रेलवे विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन टोंक जैसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जिले का रेल नेटवर्क से न जुड़ना विकास में एक बड़ी बाधा है।

सांसद ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि टोंक जिला न केवल प्रशासनिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र है। रेल सुविधा के अभाव में लोगों को सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और आर्थिक दोनों स्तर पर नुकसान उठाना पड़ता है।

लोकसभा में उठाई गई इस मांग के दौरान सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि टोंक को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने के लिए जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए और आवश्यक परियोजना को मंजूरी दी जाए। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी, बल्कि रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।

इस मुद्दे के उठने के बाद स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। टोंक और आसपास के क्षेत्रों के लोगों में लंबे समय से यह मांग रही है कि जिले को सीधे रेल लाइन से जोड़ा जाए। कई सामाजिक संगठनों और व्यापारी संघों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

इसी बीच प्रशासनिक स्तर पर उम्मीद जताई जा रही है कि यदि इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाता है तो यह परियोजना राजस्थान के Sawai Madhopur और आसपास के क्षेत्रों के साथ बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सांसद द्वारा संसद में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद अब लोगों की नजर केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय की आगामी प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। स्थानीय जनता का कहना है कि यदि यह मांग पूरी होती है तो क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सकेगा।