टोंक में बाल विवाह रोकथाम को लेकर सेमिनार, जागरूकता पोस्टर का हुआ विमोचन
जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने के लिए एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पोस्टर का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य आमजन को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना और इसे रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करना रहा। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है, जिसे रोकना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में जारी किए गए पोस्टरों के माध्यम से लोगों तक यह संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई कि कम उम्र में विवाह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर प्रभाव डालता है। इन पोस्टरों को जिले के विभिन्न गांवों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाने की योजना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक जागरूकता पहुंच सके।
अधिकारियों ने बताया कि खासतौर पर अक्षय तृतीया (आखा तीज) जैसे अवसरों पर बाल विवाह के मामले बढ़ जाते हैं, इसलिए ऐसे समय में विशेष सतर्कता और अभियान चलाना जरूरी होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ाई जा सके।
सेमिनार में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी भी दी गई और बताया गया कि इसमें दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि अगर कहीं बाल विवाह की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन या हेल्पलाइन पर सूचना दें।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी बेहद जरूरी है। इसके लिए शिक्षा, जनजागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी अहम भूमिका निभाते हैं।
सेमिनार में मौजूद प्रतिभागियों को बाल विवाह रोकने के लिए संकल्प भी दिलाया गया। सभी ने मिलकर इस कुरीति को खत्म करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने का वचन लिया।
प्रशासन का कहना है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम आगे भी लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके और आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित एवं बेहतर भविष्य मिल सके।
