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टोंक में लगा राजसखी मेला: ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को मिला मंच, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

 
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राजस्थान के Tonk जिले में आयोजित राजसखी मेला ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का बड़ा माध्यम बनकर उभर रहा है। इस मेले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पादों को प्रदर्शित और बेचने का अवसर मिला, जिससे उन्हें आर्थिक मजबूती के साथ पहचान भी मिल रही है।

मेले का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उनके उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में जिले और आसपास के क्षेत्रों से आए कई महिला स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) ने भाग लिया और अपने हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई।

मेले में लगाए गए स्टॉलों पर महिलाओं द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प, कपड़े, मसाले, खाद्य पदार्थ, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं लोगों के आकर्षण का केंद्र बनीं। स्थानीय लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर इन उत्पादों की खरीदारी की और महिलाओं का उत्साह बढ़ाया। ऐसे मेलों का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

कार्यक्रम से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, वहीं अब वे उत्पाद बनाकर उन्हें बाजार में बेच रही हैं। इससे उनकी आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

राजसखी मेला केवल व्यापार का मंच नहीं बल्कि महिलाओं के कौशल और प्रतिभा को पहचान दिलाने का भी माध्यम है। यहां आने वाले लोग ग्रामीण संस्कृति और परंपरागत कला से भी रूबरू होते हैं। कई स्टॉलों पर पारंपरिक कढ़ाई, हस्तनिर्मित कपड़े और स्थानीय हस्तशिल्प की वस्तुएं भी प्रदर्शित की गईं, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया।

कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलता है। साथ ही उन्हें व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां और प्रशिक्षण भी मिलता है, जिससे वे आगे चलकर अपना छोटा कारोबार भी शुरू कर सकती हैं।

राजस्थान में स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और विपणन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राजसखी मेले जैसे आयोजन इन प्रयासों को और मजबूत करते हैं और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

स्थानीय प्रशासन और आयोजकों का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे मेले आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इससे जुड़ सकें और अपने हुनर को बड़े मंच तक पहुंचा सकें। इससे न केवल महिलाओं की आय बढ़ेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।