मालपुरा-टोडारायसिंह लिंक रोड निर्माण में सीमांकन विवाद सुलझा, राजस्व टीम ने किया सीमाज्ञान
हाईवे-37 (मालपुरा-टोडारायसिंह) लिंक रोड के निर्माण कार्य के दौरान सीमांकन को लेकर पिछले दिनों उत्पन्न हुआ विवाद मंगलवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सुलझा लिया गया। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक सीमाज्ञान की प्रक्रिया पूरी कर स्थिति स्पष्ट की गई।
जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य के दौरान कुछ किसानों ने भूमि सीमांकन को लेकर आपत्ति जताई थी। किसानों का आरोप था कि निर्माण कार्य के दौरान उनकी कृषि भूमि के किनारों से अधिक मिट्टी की खुदाई की जा रही है, जिससे उनकी जमीन प्रभावित हो रही है। इसी विवाद के चलते निर्माण कार्य में कुछ समय के लिए बाधा उत्पन्न हो गई थी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने तुरंत राजस्व टीम को मौके पर भेजा। टीम ने मौके पर पहुंचकर भूमि का निरीक्षण किया और दोनों पक्षों की मौजूदगी में सीमांकन (सीमाज्ञान) की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद सड़क निर्माण क्षेत्र की वास्तविक सीमा स्पष्ट कर दी गई, जिससे विवाद के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।
हालांकि सीमांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी किसानों ने अपनी ओर से कुछ आपत्तियां बरकरार रखी हैं। किसानों का कहना है कि भले ही प्रशासनिक स्तर पर सीमाएं स्पष्ट कर दी गई हों, लेकिन खेतों के किनारों से मिट्टी की अनावश्यक खुदाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने ठेकेदार को स्पष्ट रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में खेतों की जमीन को किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचाया जाए।
स्थानीय किसानों ने यह भी मांग की है कि निर्माण कार्य के दौरान उनकी फसलों और खेतों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए, ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े। किसानों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी है, लेकिन इसके साथ-साथ कृषि भूमि की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि निर्माण कार्य पूरी पारदर्शिता और निर्धारित सीमा के भीतर ही किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर तुरंत जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद दोबारा उत्पन्न न हों।
फिलहाल, सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को फिर से सुचारू करने की तैयारी की जा रही है, हालांकि किसानों की निगरानी और सतर्कता अभी भी जारी है। यह मामला क्षेत्र में विकास कार्यों और किसानों के हितों के बीच संतुलन की आवश्यकता को उजागर करता है।
