स्कूलों में ही आत्मरक्षा सीखेंगी बेटियां, 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण; टोंक समेत 36,765 स्कूलों की छात्राओं को मिलेगा फायदा
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियों के लिए आत्मरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। अब छात्राओं को अपनी सुरक्षा के लिए किसी बाहरी संस्थान में जाने की जरूरत नहीं होगी। स्कूल परिसर में ही उन्हें आत्मरक्षा की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार की इस पहल का लाभ प्रदेशभर के 36 हजार 765 राजकीय विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं को मिलेगा।
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने सत्र 2026-27 के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक की सभी बालिकाओं के लिए विशेष आत्मरक्षा प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम को स्कूल स्तर पर संचालित करने की योजना बनाई गई है, ताकि अधिक से अधिक छात्राएं इसका लाभ उठा सकें।
इस कार्यक्रम के तहत छात्राओं को 10 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल उन्हें आत्मरक्षा की कुछ तकनीकें सिखाना नहीं है, बल्कि उनके अंदर सुरक्षा को लेकर जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाना भी है। छात्राओं को विपरीत परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने, खतरे को पहचानने और जरूरत पड़ने पर उसका सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा।
स्कूलों में होने वाला यह प्रशिक्षण बालिकाओं के शारीरिक विकास के साथ मानसिक और भावनात्मक मजबूती पर भी केंद्रित रहेगा। अक्सर छात्राएं सार्वजनिक स्थानों, यात्रा या अन्य परिस्थितियों में असुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसे में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण उन्हें मुश्किल स्थिति में घबराने के बजाय समझदारी से प्रतिक्रिया देने में मदद कर सकता है।
सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम को प्रदेश के सरकारी स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा। इसका दायरा बड़ा होने के कारण ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाली छात्राओं को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर उन बालिकाओं के लिए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण लेने के लिए अलग से किसी संस्थान तक जाने का अवसर नहीं मिल पाता।
टोंक समेत प्रदेश के सभी जिलों के सरकारी विद्यालय इस कार्यक्रम के दायरे में रहेंगे। स्कूल स्तर पर प्रशिक्षण होने से छात्राओं को उनके नियमित शैक्षणिक वातावरण में ही आत्मरक्षा सीखने का मौका मिलेगा। इससे अभिभावकों को भी अपनी बेटियों की सुरक्षा और प्रशिक्षण को लेकर अतिरिक्त व्यवस्था करने की जरूरत नहीं होगी।
आत्मरक्षा प्रशिक्षण को बालिकाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसका लक्ष्य छात्राओं में आत्मविश्वास पैदा करने के साथ उन्हें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना है। 10 दिन के इस विशेष प्रशिक्षण के जरिए प्रदेश की लाखों छात्राओं को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
