सरकारी स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए इसी सत्र से शुरू होगी ई-पाठशाला
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए इसी शैक्षणिक सत्र में ई-पाठशाला कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर की ओर से इस संबंध में प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशक, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
ई-पाठशाला कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराना और नियमित कक्षा शिक्षण के साथ ऑनलाइन शैक्षणिक सामग्री तक उनकी पहुंच बढ़ाना है। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को विषयवार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों में संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां करने को कहा गया है। स्कूल स्तर पर भी शिक्षकों और विद्यार्थियों को कार्यक्रम से जोड़ने की प्रक्रिया की जाएगी।
कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थी इस कार्यक्रम के जरिए अपने पाठ्यक्रम से संबंधित शैक्षणिक सामग्री का डिजिटल माध्यम से उपयोग कर सकेंगे। इससे विद्यार्थियों को स्कूल के अलावा घर पर भी पढ़ाई दोहराने में मदद मिलेगी।
डिजिटल पढ़ाई को मिलेगा बढ़ावा
ई-पाठशाला कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा। इससे खासतौर पर बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को अपने विषयों की तैयारी और दोहराव में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
विभाग की ओर से कार्यक्रम को इसी सत्र में लागू करने की तैयारी की जा रही है। जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश मिलने के बाद अब स्कूलों में इसके संचालन को लेकर तैयारियां शुरू की जाएंगी।
टोंक सहित पूरे प्रदेश में लागू होगा कार्यक्रम
यह कार्यक्रम केवल टोंक जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए लागू किया जाएगा। संबंधित अधिकारी स्कूलों तक निर्देश पहुंचाने और कार्यक्रम के संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
ई-पाठशाला शुरू होने के बाद विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ डिजिटल संसाधनों का लाभ मिल सकेगा। इससे शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
