टोंक में 10 साल पुराने रिश्वत मामले में तत्कालीन पटवारी को 4 साल की सजा, 25 हजार रुपए जुर्माना
टोंक में रिश्वतखोरी के करीब 10 साल पुराने मामले में भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय ने फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में तत्कालीन पटवारी को दोषी मानते हुए 4 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत के फैसले के बाद प्रकरण का निस्तारण हुआ।
मामला करीब 10 साल पहले का है। आरोप था कि तत्कालीन पटवारी ने राजस्व संबंधी काम करवाने के एवज में रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी की ओर से मामले की जांच और कार्रवाई की गई थी। जांच के दौरान रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए और प्रकरण अदालत तक पहुंचा।
मामले की सुनवाई भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत के सामने मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तत्कालीन पटवारी को दोषी माना और चार साल के कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने सजा के साथ आरोपी पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। फैसला आने के बाद करीब एक दशक से लंबित इस रिश्वत प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई।
भ्रष्टाचार निरोधक मामलों में सरकारी कर्मचारी द्वारा पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से राशि मांगने या लेने के आरोपों की जांच एसीबी की ओर से की जाती है। ऐसे मामलों में शिकायत के आधार पर सत्यापन और कार्रवाई के बाद जांच पूरी कर आरोप पत्र अदालत में पेश किया जाता है।
टोंक के इस मामले में भी शिकायत के बाद तत्कालीन पटवारी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इसके बाद मामले की न्यायिक सुनवाई लंबे समय तक चली। अब अदालत ने दोष सिद्ध होने पर चार साल की सजा और 25 हजार रुपए के जुर्माने का आदेश दिया है।
अदालत के फैसले के बाद भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया और जांच की भूमिका एक बार फिर सामने आई है। हालांकि, इस मामले से जुड़े अन्य विस्तृत तथ्य, जैसे रिश्वत की राशि, शिकायतकर्ता का विवरण और कार्रवाई की तारीख, उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं हैं।
