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‘किसानों के रुपए लेकर विदेश भाग रहे व्यापारी’: भुगतान नहीं मिलने से आक्रोश, चेक हो रहे बाउंस

 
‘किसानों के रुपए लेकर विदेश भाग रहे व्यापारी’: भुगतान नहीं मिलने से आक्रोश, चेक हो रहे बाउंस

क्षेत्र के किसानों ने कुछ व्यापारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे उनकी उपज खरीदकर भुगतान किए बिना विदेश भाग रहे हैं। किसानों का कहना है कि उन्होंने बड़ी मात्रा में गाजर की फसल व्यापारियों को बेची, लेकिन अब तक उन्हें पूरा भुगतान नहीं मिला है। स्थिति यह है कि कई किसानों को दिए गए चेक भी बाउंस हो रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई है।

किसानों के मुताबिक, सीजन के दौरान व्यापारियों ने ऊंचे दाम का लालच देकर गाजर की खरीद की। भुगतान के लिए कुछ को नकद आश्वासन दिया गया, तो कई को आगे की तारीख के चेक थमा दिए गए। जब किसान बैंक पहुंचे तो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण चेक बाउंस हो गए। इससे किसानों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि बैंकिंग प्रक्रिया में भी उन्हें अतिरिक्त शुल्क और परेशानी झेलनी पड़ी।

कर्ज और खर्च का बढ़ा दबाव

किसानों ने बताया कि गाजर की खेती में बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर भारी खर्च आता है। अधिकांश किसानों ने फसल तैयार करने के लिए कर्ज लिया था। अब भुगतान अटकने से वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हो रहे हैं। कुछ किसानों का कहना है कि घर-परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है।

एक किसान ने बताया, “हमने भरोसे में फसल दे दी। अब व्यापारी फोन नहीं उठा रहे। बैंक से चेक बाउंस की सूचना आ रही है। हम जाएं तो जाएं कहां?” किसानों ने प्रशासन से हस्तक्षेप कर बकाया राशि दिलाने की मांग की है।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

पीड़ित किसानों ने संबंधित थाने और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो अन्य किसान भी इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं। किसानों ने मांग की है कि व्यापारियों की संपत्ति की जांच कर बकाया राशि वसूल की जाए और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई हो।

व्यापार मंडी में चिंता का माहौल

घटना के बाद स्थानीय मंडी में भी चिंता का माहौल है। कई किसानों ने अब बिना पूरी भुगतान व्यवस्था के माल देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि भविष्य में वे केवल विश्वसनीय और पंजीकृत व्यापारियों को ही उपज बेचेंगे।

किसानों का कहना है कि सरकार और मंडी प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे भुगतान सीधे किसानों के खातों में सुरक्षित तरीके से पहुंचे। डिजिटल भुगतान या एस्क्रो सिस्टम जैसी पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की भी मांग उठ रही है।

फिलहाल किसान अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।