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श्रीगंगानगर के छात्र की कनाडा में हार्ट अटैक से मौत, 12 दिन से पार्थिव शरीर का इंतजार

 
श्रीगंगानगर के छात्र की कनाडा में हार्ट अटैक से मौत, 12 दिन से पार्थिव शरीर का इंतजार

राजस्थान के Sri Ganganagar जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जिले के एक 26 वर्षीय छात्र की कनाडा में हार्ट अटैक से मौत हो गई है। मृतक युवक टोरंटो के ब्रैम्पटन शहर में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसकी पहचान हरप्रीत के रूप में हुई है, जिसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

परिवार के अनुसार, हरप्रीत की मौत 28 मार्च को हुई थी, लेकिन अब तक 12 दिन बीत जाने के बावजूद उसका पार्थिव शरीर भारत नहीं लाया जा सका है। परिजन लगातार बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहे हैं और इस अनिश्चितता के कारण उनका दुख और भी बढ़ गया है।

जानकारी के मुताबिक, हरप्रीत पढ़ाई के लिए कनाडा गया था और वह Toronto के पास स्थित Brampton शहर में रहकर अपनी शिक्षा पूरी कर रहा था। वह अपने भविष्य को लेकर काफी मेहनती और महत्वाकांक्षी बताया जा रहा था। अचानक आई इस खबर ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है।

परिजनों ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही उन्होंने तुरंत स्थानीय और विदेश में मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से संपर्क किया। हालांकि, कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण शव को भारत लाने में देरी हो रही है। परिवार का कहना है कि हर बीतता दिन उनके लिए बेहद कठिन साबित हो रहा है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, विदेश में किसी भारतीय नागरिक की मृत्यु के बाद पोस्टमॉर्टम, कानूनी अनुमति और दूतावास की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता है। इसी वजह से पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है।

इस बीच, परिवार ने भारत सरकार और संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द कार्रवाई की अपील की है ताकि बेटे का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया जा सके। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने भी परिवार को सांत्वना दी है और इस कठिन समय में उनके साथ खड़े हैं।

गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। लोग लगातार परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं और इस दुखद घटना पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। हरप्रीत की असमय मृत्यु ने विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल, परिवार को केवल एक ही उम्मीद है कि जल्द से जल्द कानूनी प्रक्रिया पूरी होकर उनका बेटा घर वापस आ सके, ताकि वे अंतिम संस्कार कर उसे विदाई दे सकें।