श्रीगंगानगर नगर परिषद गांवों में छोड़ रही आवारा पशु, ग्रामीणों ने बीच रास्ते में रोका ट्रक; बोले- शहर में छोड़ देंगे हजारों जानवर
श्रीगंगानगर में आवारा पशुओं को लेकर विवाद सामने आया है। नगर परिषद की ओर से आवारा पशुओं को गांवों में छोड़े जाने के आरोप के बाद ग्रामीणों ने ट्रक को बीच रास्ते में रोक लिया। ग्रामीणों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि शहर में आवारा पशुओं की समस्या है, तो उन्हें गांवों में छोड़कर ग्रामीणों के सामने नई परेशानी खड़ी नहीं की जानी चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक, आवारा पशुओं को गांवों में छोड़ने से किसानों और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खेतों में घूमने वाले पशु फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, सड़कों पर पशुओं की मौजूदगी से आवागमन प्रभावित होने और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों ने ट्रक रोककर जताया विरोध
जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने आवारा पशुओं को लेकर जा रहे ट्रक को रास्ते में रोक लिया। इस दौरान उन्होंने पशुओं को गांवों में छोड़ने पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों का कहना था कि शहर की समस्या का समाधान गांवों में पशु छोड़कर नहीं किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि इसी तरह शहर से हजारों आवारा पशुओं को गांवों में छोड़ा जाएगा, तो वे भी पशुओं को शहर में छोड़ देंगे। इससे साफ है कि आवारा पशुओं के प्रबंधन को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच विवाद की स्थिति बन सकती है।
आवारा पशुओं के प्रबंधन पर उठे सवाल
आवारा पशुओं की समस्या कई जगह लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। शहरों में सड़कों पर घूमते पशुओं से यातायात बाधित होता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इनके कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में पशुओं को एक जगह से दूसरी जगह छोड़ने के बजाय उनके उचित प्रबंधन की व्यवस्था करना जरूरी है।
फिलहाल, इस मामले में नगर परिषद का आधिकारिक पक्ष और ट्रक में मौजूद पशुओं की संख्या जैसी जानकारी सामने आना बाकी है। ग्रामीणों के विरोध के बाद अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।
