श्रीगंगानगर में फिरोजपुर फीडर नहरबंदी के विरोध में प्रदर्शन, किसान-मजदूर समिति ने जताई आपत्ति
श्रीगंगानगर में पंजाब जल संसाधन विभाग द्वारा जनवरी में प्रस्तावित फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण और नहरबंदी के कदम का ग्रामीण किसान मजदूरों ने विरोध किया है। सोमवार को इस बाबत ग्रामीण किसान मजदूर समिति ने जल संसाधन विभाग के कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया।
सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसानों और मजदूरों का कहना था कि नहरबंदी से इलाके के खेती योग्य जमीन और जल उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि नहरबंदी के कारण कई ग्रामीणों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और इससे उनके जीवनयापन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बैनर और पोस्टर लेकर अपनी मांग और आपत्ति व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील भी की। समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें यह उम्मीद थी कि विभाग स्थानीय लोगों की सहमति और सुझाव लेकर ही नहरबंदी का प्रस्ताव पेश करेगा।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि नहरबंदी का उद्देश्य फीडर के पुनर्निर्माण और जल वितरण प्रणाली को दुरुस्त करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विभाग स्थानीय किसानों और मजदूरों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए काम करेगा और किसी भी तरह की अनावश्यक कठिनाई नहीं आने दी जाएगी।
स्थानीय नेताओं और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने भी इस दौरान प्रदर्शन में हिस्सा लिया और विभाग से संवाद और समझौता की मांग की। उन्होंने कहा कि कृषि और सिंचाई के हित में विभाग को स्थानीय लोगों के सुझावों को शामिल करना चाहिए ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
वहीं, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हो और किसी तरह की हिंसा या अव्यवस्था न हो। पुलिस ने कार्यालय और आसपास के क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी और प्रदर्शनकारियों को मार्गदर्शन दिया।
ग्रामीण किसान मजदूर समिति का कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों को उचित रूप से नहीं सुना गया, तो वे भविष्य में बड़े पैमाने पर आंदोलन करने की योजना बना सकते हैं। उनका उद्देश्य केवल यह है कि स्थानीय लोगों के अधिकारों और सिंचाई के संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
इस प्रकार, श्रीगंगानगर में फिरोजपुर फीडर की नहरबंदी को लेकर किसानों और मजदूरों के विरोध ने प्रशासन और जल संसाधन विभाग के लिए गंभीर संवाद और समाधान की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। मामला जल्द ही विभाग और ग्रामीणों के बीच बैठक के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
