पंचायत चुनाव में ऊंट-बैलगाड़ी से नहीं कर सकेंगे प्रचार: सरपंच को 1 और जिला परिषद उम्मीदवार को 3 वाहन की अनुमति, पढ़ें पूरे नियम
राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव को लेकर चुनावी गतिविधियां तेज होने के साथ ही प्रत्याशियों के प्रचार को लेकर नियम भी लागू हो गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रचार में वाहनों के इस्तेमाल, चुनावी खर्च, पोस्टर-बैनर और लाउडस्पीकर को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत प्रत्याशी मनमाने तरीके से वाहनों का काफिला निकालकर प्रचार नहीं कर सकेंगे।
सरपंच के लिए एक, जिला परिषद उम्मीदवार के लिए तीन वाहन
चुनाव प्रचार के दौरान वाहनों की संख्या पद के अनुसार तय की गई है। सरपंच पद के उम्मीदवार को अधिकतम एक वाहन इस्तेमाल करने की अनुमति होगी। पंचायत समिति सदस्य का प्रत्याशी अधिकतम दो वाहन, जबकि जिला परिषद सदस्य का उम्मीदवार अधिकतम तीन वाहन प्रचार में लगा सकेगा। प्रचार में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की पूर्व सूचना संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को देना जरूरी होगा।
ऊंट-बैलगाड़ी और बड़े वाहनों से प्रचार पर रोक
चुनाव प्रचार के दौरान भीड़ जुटाने या शक्ति प्रदर्शन के लिए बड़े वाहनों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। नियमों के तहत बस, ट्रक और मिनी बस के साथ पशु चालित वाहनों को भी प्रचार अभियान में इस्तेमाल करने पर रोक रहेगी। यानी प्रत्याशी ऊंट, बैलगाड़ी या इस तरह के पशु-चालित साधनों से चुनाव प्रचार नहीं कर सकेंगे।
रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बंद
प्रचार के दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर भी समय सीमा तय है। रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या दूसरे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में भी लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहेगी।
पोस्टर-बैनर लगाने के लिए अनुमति जरूरी
प्रत्याशी सार्वजनिक या निजी संपत्ति पर पोस्टर, बैनर और होर्डिंग मनमाने तरीके से नहीं लगा सकेंगे। इसके लिए संबंधित स्थानीय प्रशासन या निजी संपत्ति के मालिक से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा। मतदान केंद्र के 200 मीटर के दायरे में प्रचार सामग्री लगाने या बांटने पर भी रोक रहेगी।
कितने रुपये तक खर्च कर सकेंगे उम्मीदवार?
चुनावी खर्च की सीमा भी पद के हिसाब से निर्धारित की गई है। जिला परिषद सदस्य का उम्मीदवार अधिकतम 3 लाख रुपये, पंचायत समिति सदस्य का उम्मीदवार 1.50 लाख रुपये और सरपंच पद का प्रत्याशी अधिकतम 1 लाख रुपये तक चुनाव प्रचार पर खर्च कर सकेगा।
खर्च का हिसाब देना होगा
प्रत्येक उम्मीदवार को चुनाव प्रचार के दौरान किए गए खर्च का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद निर्धारित अवधि में चुनावी खर्च का विवरण संबंधित अधिकारी को जमा करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ चुनाव लड़ने से अयोग्यता जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
नियम तोड़े तो 2 हजार रुपये जुर्माना
राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रचार संबंधी नियमों का उल्लंघन करने पर 2 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर या निर्धारित नियमों के उल्लंघन पर उम्मीदवार को 6 साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य किए जाने का प्रावधान भी बताया गया है। ऐसे में प्रत्याशियों को प्रचार अभियान शुरू करने से पहले सभी नियमों की जानकारी रखना जरूरी होगा।
