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10 साल के वाड़ाखेड़ा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट में पहले चरण में ही अड़चन, बजट और टेंडर में फंसा ब्लैकबक संरक्षण कार्य

 
10 साल के वाड़ाखेड़ा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट में पहले चरण में ही अड़चन, बजट और टेंडर में फंसा ब्लैकबक संरक्षण कार्य

लंबे समय से प्रस्तावित वाड़ाखेड़ा कंजर्वेशन प्रोजेक्ट अपने पहले चरण में ही गंभीर अड़चनों में फंस गया है। करीब 10 साल की अवधि वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत किया जा रहा Blackbuck संरक्षण कार्य अभी तक बजट और टेंडर प्रक्रिया की जटिलताओं के कारण आगे नहीं बढ़ पाया है।

सूत्रों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। योजना के तहत ब्लैकबक की बढ़ती घटती आबादी को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने, उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने का लक्ष्य रखा गया था।

हालांकि, परियोजना की शुरुआत के कई वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीन पर काम की गति बेहद धीमी रही है। पहले चरण में ही टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद और बजट आवंटन में देरी के चलते काम आगे नहीं बढ़ सका। इससे न केवल परियोजना की समय-सीमा प्रभावित हुई है, बल्कि संरक्षण कार्य की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय स्तर पर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय स्वीकृति समय पर नहीं मिल सकी, जिसके कारण निर्माण और विकास कार्यों में देरी हुई। इसके अलावा, टेंडर प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों ने भी परियोजना की रफ्तार को रोक दिया।

Wadakheda क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के शुरू होने से उन्हें रोजगार और क्षेत्रीय विकास की उम्मीद थी, लेकिन लगातार देरी के कारण स्थानीय लोगों में निराशा बढ़ रही है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि योजना समय पर पूरी होती, तो क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता।

पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि परियोजना में देरी से वन्यजीव संरक्षण प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ब्लैकबक जैसे संवेदनशील प्रजाति के लिए सुरक्षित आवास और निगरानी व्यवस्था बेहद जरूरी है, लेकिन समय पर कार्य न होने से उनके संरक्षण में बाधा आ रही है।

Forest Department के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को लेकर दोबारा समीक्षा की जा रही है और टेंडर प्रक्रिया को सरल बनाकर जल्द ही काम को आगे बढ़ाने की योजना है। विभाग ने आश्वासन दिया है कि आवश्यक बजट उपलब्ध होते ही रुके हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाएगा।

इस बीच, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी राज्य सरकार से मांग की है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति मिल सके।

फिलहाल स्थिति यह है कि 10 साल की योजना अपने शुरुआती चरण में ही अटकी हुई है, और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो पूरे प्रोजेक्ट की सफलता पर गंभीर असर पड़ सकता है।