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फर्नीचर दुकान के सेल्समैन का बेटा बना चार्टर्ड अकाउंटेंट, हिंदी मीडियम से पढ़कर योगेश यादव ने रचा इतिहास

 
सीकर में फर्नीचर सेल्समैन का बेटा बना CA:कहा- इंग्लिश में लिखी किताबें पहाड़ जैसी लगती थी, कमजोरी को ताकत बनाया

सीकर में फर्नीचर की दुकान पर सेल्समैन का काम करने वाले गिरिराज यादव के बेटे योगेश यादव ने चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनकर परिवार और जिले का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों और हिंदी माध्यम की पृष्ठभूमि के बावजूद योगेश ने कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर यह उपलब्धि हासिल की।

योगेश ने अपनी पूरी स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल से हिंदी मीडियम में पूरी की। उन्होंने बताया कि करीब 15 साल तक हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बाद जब उन्होंने सीए बनने का सपना देखा, तो शुरुआत में अंग्रेजी में लिखी मोटी किताबें किसी पहाड़ से कम नहीं लगीं। “पहली बार जब सीए की इंग्लिश बुक्स देखीं, तो लगा कि क्या मैं ये कर पाऊंगा? आत्मविश्वास डगमगाने लगा था,” योगेश ने कहा।

उन्होंने बताया कि अंग्रेजी भाषा को समझना और तकनीकी शब्दावली को पकड़ना सबसे बड़ी चुनौती थी। कई बार ऐसा लगा कि रास्ता बदल लेना चाहिए, लेकिन परिवार का समर्थन उनके लिए संबल बना। पिता गिरिराज यादव, जो फर्नीचर की दुकान में सेल्समैन हैं, ने बेटे का हौसला बढ़ाया और कहा कि मेहनत से सब संभव है। मां और अन्य परिजनों ने भी हर कदम पर प्रेरित किया।

योगेश ने बताया कि उन्होंने अंग्रेजी सुधारने के लिए अतिरिक्त समय दिया। शब्दकोश की मदद ली, ऑनलाइन लेक्चर देखे और सीनियर्स से मार्गदर्शन लिया। धीरे-धीरे आत्मविश्वास बढ़ता गया और उन्होंने सीए की कठिन परीक्षाएं एक-एक कर पार कर लीं।

योगेश की सफलता से न केवल उनका परिवार, बल्कि पूरा क्षेत्र गर्व महसूस कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उपलब्धि उन छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के कारण खुद को कमजोर समझते हैं। योगेश ने साबित किया है कि भाषा बाधा नहीं, बल्कि मेहनत और लगन ही असली ताकत है।

योगेश ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास को दिया। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि वे आगे चलकर समाज के जरूरतमंद छात्रों को मार्गदर्शन दें, ताकि वे भी बड़े लक्ष्य हासिल कर सकें।

सीकर जैसे शैक्षणिक रूप से अग्रणी जिले में योगेश की यह उपलब्धि एक नई मिसाल बनकर सामने आई है, जो बताती है कि सपने बड़े हों और हौसले मजबूत, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।