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किशनगढ़ रेनवाल में अध्यक्ष पद का मुकाबला दिलचस्प: एक ही परिवार की चाचा-भतीजे की पत्नियां आमने-सामने, नतीजों के बाद बढ़ी सियासी हलचल

 
किशनगढ़ रेनवाल में अध्यक्ष पद का मुकाबला दिलचस्प: एक ही परिवार की चाचा-भतीजे की पत्नियां आमने-सामने, नतीजों के बाद बढ़ी सियासी हलचल

किशनगढ़ रेनवाल नगरपालिका चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी मुकाबला उस समय और रोचक हो गया, जब अध्यक्ष पद के लिए एक ही परिवार की दो महिलाएं आमने-सामने आ गईं। रिश्ते में चाचा और भतीजे की पत्नियां अब नगरपालिका अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर चुनावी मैदान में हैं।

नगरपालिका चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद पार्षदों के बीच अध्यक्ष पद को लेकर जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की कवायद शुरू हो गई है। इसी बीच एक ही परिवार की दो बहुओं के आमने-सामने आने से किशनगढ़ रेनवाल का चुनाव स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

परिवार में ही आमने-सामने हुई दावेदारी

अध्यक्ष पद के लिए सामने आई दोनों महिला उम्मीदवार एक ही परिवार से जुड़ी हैं। इनमें एक चाचा की पत्नी हैं, जबकि दूसरी भतीजे की पत्नी बताई जा रही हैं। ऐसे में राजनीतिक मुकाबले के साथ-साथ पारिवारिक समीकरण भी चर्चा में आ गए हैं।

दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन में पार्षदों को लामबंद करने में जुटे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद संभावित अध्यक्ष को लेकर पार्षदों के साथ बैठकों का दौर शुरू हो गया है। कौन सा खेमा कितने पार्षदों का समर्थन जुटा पाता है, यह अध्यक्ष चुनाव में महत्वपूर्ण होगा।

नतीजों के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

नगरपालिका चुनाव के परिणाम सामने आने के साथ ही अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक दलों और पार्षदों की सक्रियता बढ़ गई है। अलग-अलग खेमों की ओर से पार्षदों से संपर्क किया जा रहा है। अध्यक्ष पद के चुनाव में संख्या बल सबसे अहम माना जा रहा है।

ऐसे में दोनों उम्मीदवारों के समर्थक अपने पक्ष में अधिक से अधिक पार्षदों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बैठकों और बातचीत का दौर जारी है। हालांकि अंतिम तस्वीर नामांकन और चुनाव प्रक्रिया के अगले चरण में ही साफ होगी।

परिवार से लेकर राजनीति तक चर्चा

किशनगढ़ रेनवाल में अध्यक्ष पद के लिए एक ही परिवार की दो महिलाओं के आमने-सामने आने की चर्चा राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के बीच भी हो रही है। आम तौर पर चुनावी मुकाबले में अलग-अलग राजनीतिक खेमों के उम्मीदवार आमने-सामने होते हैं, लेकिन यहां पारिवारिक रिश्ते होने के कारण मुकाबला अलग तरह का नजर आ रहा है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि परिवार से जुड़े इन दोनों दावेदारों में से किसे पार्षदों का समर्थन मिलता है और कौन अध्यक्ष पद तक पहुंचता है। चुनाव परिणामों के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच निर्दलीय और अन्य पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

अध्यक्ष चुनाव पर टिकी नजर

किशनगढ़ रेनवाल नगरपालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर अब स्थानीय राजनीति का केंद्र इसी मुकाबले पर आ गया है। दोनों उम्मीदवारों की दावेदारी और उनके समर्थन में खड़े पार्षदों की संख्या पर नजर रखी जा रही है।

अंतिम फैसला चुनाव प्रक्रिया के दौरान पार्षदों के मतदान से होगा। फिलहाल एक ही परिवार की चाचा-भतीजे की पत्नियों के अध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने आने से किशनगढ़ रेनवाल नगरपालिका का चुनाव खासा चर्चित हो गया है।