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सीकर जिला परिषद चुनाव: वार्ड-11 में सबसे ज्यादा 8 प्रत्याशी मैदान में, कई वार्डों में सीधा मुकाबला

 
सीकर जिला परिषद चुनाव: वार्ड-11 में सबसे ज्यादा 8 प्रत्याशी मैदान में, कई वार्डों में सीधा मुकाबला

राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर सीकर जिले में चुनावी हलचल तेज हो गई है। जिला परिषद सदस्य पद के लिए उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होने के बाद अलग-अलग वार्डों में मुकाबले की तस्वीर साफ होने लगी है। वार्ड नंबर 11 में सबसे ज्यादा 8 प्रत्याशी मैदान में होने की जानकारी सामने आई है, जबकि कई वार्डों में मुकाबला सीमित उम्मीदवारों के बीच है।

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सीकर जिला परिषद में 49 वार्ड

सीकर जिला परिषद में कुल 49 वार्ड हैं। इन वार्डों से जिला परिषद सदस्य चुने जाएंगे। चुनाव के लिए बीजेपी और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इसके साथ ही निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची के आधार पर प्रत्याशी अब प्रचार में जुट रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय विकास, सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाएं चुनावी चर्चा के प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं।

वार्ड-11 में कई प्रत्याशियों के बीच मुकाबला

वार्ड नंबर 11 में सबसे ज्यादा 8 प्रत्याशी मैदान में होने की बात सामने आई है। ऐसे में यहां मुकाबला कई उम्मीदवारों के बीच होगा। हालांकि, प्रत्याशियों के नाम और उनकी पार्टीवार स्थिति की पुष्टि अंतिम आधिकारिक सूची से करना जरूरी है।दूसरी ओर, कुछ वार्डों में उम्मीदवारों की संख्या कम होने से सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। कम प्रत्याशी होने का मतलब अपने आप में किसी उम्मीदवार की जीत तय होना नहीं है। अंतिम फैसला मतदाता मतदान के जरिए करेंगे।

बीजेपी-कांग्रेस के साथ निर्दलीय भी मैदान में

सीकर जिले में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी भी अहम है। कुछ वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवार प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को चुनौती दे रहे हैं। टिकट वितरण के बाद स्थानीय स्तर पर बने समीकरण भी चुनाव प्रचार को प्रभावित कर सकते हैं।कांग्रेस ने सीकर जिला परिषद के 49 वार्डों में से 48 के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की थी, जबकि एक वार्ड पर निर्णय लंबित बताया गया था।

अब प्रचार पर रहेगा जोर

अंतिम प्रत्याशी सूची आने के बाद उम्मीदवारों का ध्यान जनसंपर्क और प्रचार अभियान पर है। गांवों में बैठकों, घर-घर संपर्क और स्थानीय मुद्दों के जरिए मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।