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सीकर पुलिस का ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’: साइबर फ्रॉड पर बड़ी सख्ती, बैंक अकाउंट किराए पर देने वालों पर भी शिकंजा

 
सीकर पुलिस का ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’: साइबर फ्रॉड पर बड़ी सख्ती, बैंक अकाउंट किराए पर देने वालों पर भी शिकंजा

साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के बीच अब पुलिस और प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अब यदि किसी भी बैंक खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ा मात्र 1 रुपया भी आता है, तो उस खाते के धारक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तय मानी जाएगी। इतना ही नहीं, यदि कोई व्यक्ति थोड़े से लालच में अपना बैंक अकाउंट किसी अन्य को किराए पर देता है, तो न केवल अकाउंट धारक बल्कि अकाउंट किराए पर लेने वाला व्यक्ति भी जेल की सजा का सामना कर सकता है।

सीकर पुलिस द्वारा चलाया जा रहा विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस अभियान के तहत पुलिस उन बैंक खातों की पहचान कर रही है, जिन्हें साइबर ठगों द्वारा “म्यूल अकाउंट” यानी फर्जी और ट्रांजैक्शन छुपाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले खातों के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार साइबर अपराधी अक्सर लोगों को पैसे का लालच देकर उनके बैंक अकाउंट ले लेते हैं और फिर उन खातों के जरिए ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करते हैं ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। ऐसे खाताधारक कई बार यह सोचकर अकाउंट दे देते हैं कि यह सिर्फ कुछ समय के लिए उपयोग होगा, लेकिन बाद में वे गंभीर कानूनी मुश्किलों में फंस जाते हैं।

अब नई कार्रवाई नीति के तहत ऐसे सभी खातों की गहन जांच की जा रही है जिनमें संदिग्ध ट्रांजैक्शन पाए जा रहे हैं। जैसे ही किसी खाते में साइबर फ्रॉड से जुड़ा पैसा आता है, उसे जांच के दायरे में लिया जाएगा और खाताधारक से पूछताछ की जाएगी। यदि यह साबित होता है कि अकाउंट का उपयोग अपराध में हुआ है, तो संबंधित व्यक्ति को सह-आरोपी माना जाएगा।

पुलिस ने साफ किया है कि अकाउंट किराए पर देना भी अपराध की श्रेणी में आता है और यह गंभीर साइबर क्राइम को बढ़ावा देता है। इसलिए अब न केवल साइबर ठगों पर बल्कि उनके नेटवर्क को सहयोग देने वाले हर व्यक्ति पर कार्रवाई की जाएगी।

‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत सीकर पुलिस लगातार बैंक और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर डेटा विश्लेषण कर रही है। संदिग्ध खातों को चिन्हित कर उनके लेन-देन की जांच की जा रही है और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी हालत में अपना बैंक अकाउंट, एटीएम कार्ड, ओटीपी या बैंकिंग डिटेल किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा न करें। थोड़े से आर्थिक लाभ के लिए किया गया यह कदम भविष्य में भारी कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।

इस अभियान के माध्यम से पुलिस का लक्ष्य साइबर फ्रॉड के पूरे नेटवर्क को तोड़ना और आम नागरिकों को जागरूक करना है, ताकि लोग ऐसे अपराधों का हिस्सा बनने से बच सकें।