सीकर: पासपोर्ट एजेंटों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
जिले में पासपोर्ट सेवा से जुड़े एजेंटों/दलालों के खिलाफ धोखाधड़ी एवं रुपए मांगने के आरोप में स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ एजेंटों ने कानूनी प्रक्रिया के नाम पर लोगों से अनावश्यक रुपए मांगे या दुश्मनी में काम रोकने की धमकी दी, जिससे कई आवेदकों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ा।
यह मामला ऐसे समय पर सामने आया है जब सरकारी सेवाओं से जुड़े फ्रॉड और भ्रष्टाचार की शिकायतें देशभर में बढ़ रही हैं। पासपोर्ट एक संवेदनशील दस्तावेज़ है, जिसके लिए आम नागरिक वर्षों से प्रतीक्षा करते हैं, और इसी अवसर का दुरुपयोग कुछ एजेंटों द्वारा किया जा रहा है।
आवेदकों का आरोप है कि कुछ एजेंट पासपोर्ट के वेरिफिकेशन और आगे की प्रक्रिया को तेज़ करने या टालने के लिए पैसे की मांग करते थे। कई पीड़ितों के अनुसार, जब उन्होंने पैसे देने से इनकार किया तो एजेंटों ने उनकी फ़ाइल को आगे नहीं बढ़ाया, या उन्हें निराशाजनक जवाब देकर प्रक्रिया रोक दी। ऐसे धोखाधड़ी वाले व्यवहार के कारण लोगों को कई महीनों तक अपना पासपोर्ट मिलने में देरी होती है, जिससे यात्राएँ और सरकारी कार्य प्रभावित होते हैं।
स्थानीय पुलिस ने दर्ज प्राथमिकी में बताया कि अब तक कुछ एजेंटों के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और आपराधिक विश्वास के आरोप के तहत मामला दर्ज हुआ है और आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यदि शिकायतें प्रमाणित होती हैं तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि पासपोर्ट जैसे सरकारी दस्तावेज़ के लिए सीधे सरकारी पोर्टल (Passport Seva Kendra) और अधिकृत सेवाओं का ही इस्तेमाल करना चाहिए। किसी भी एजेंट या दलाल को आधिकारिक मार्ग न होने पर पैसे देना अनिवार्य नहीं होता तथा ठगी की संभावना बनी रहती है। ऐसे मामलों में नागरिकों को तुरंत ग्राहक फोरम, पोर्टल शिकायत प्रणाली या पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करानी चाहिए, ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट प्रक्रिया में कोई कथित ‘ब्रफ़ या अतिरिक्त फीस’ वैध रूप से स्वीकार नहीं की जाती, और कोई भी कर्मचारी/एजेंट पासपोर्ट प्राधिकरण से बिना अनुमति किसी अतिरिक्त चार्ज नहीं ले सकता। आवेदकों को भी यह सलाह दी जा रही है कि वे ऑनलाइन भुगतान और आधिकारिक नोटिफिकेशन को ही प्राथमिकता दें, और किसी भी तरह की नकद लेन-देन से पहले संबंधित सेवा केंद्र से पुष्टि करें।
राजस्थान में हाल ही में सरकारी और पुलिस विभाग दोनों ही धोखाधड़ी, फर्जी वीजा रैकेट और साइबर फ्रॉड जैसे मामलों में सक्रियता दिखा रहे हैं, और लोगों को जागरूक करने के प्रयास जारी हैं। ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस डिजिटल साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और बैंक ट्रांज़ैक्शन्स की जांच कर रही है।
खबर का असर यह है कि आम नागरिकों को सरकारी दस्तावेज़ प्रक्रिया में सहयोग देने के नाम पर पैसे मांगने वाले एजेंटों के खिलाफ सचेत रहना होगा, और किसी भी तरह की धोखाधड़ी का सामना होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराना चाहिए।
