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NEET पेपर लीक के बाद जान देने वाले छात्र के परिजनों से राहुल गांधी ने पूछे 4 सवाल, मांगें सुनकर बोले- 'ये तो हम कर सकते हैं'

 
NEET पेपर लीक के बाद जान देने वाले छात्र के परिजनों से राहुल गांधी ने पूछे 4 सवाल, मांगें सुनकर बोले- 'ये तो हम कर सकते हैं'

नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बीच जान देने वाले एक छात्र के परिजनों से कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने परिवार का हालचाल जाना और घटना को लेकर गहरी संवेदना व्यक्त की।

परिजनों के साथ बातचीत में राहुल गांधी ने भावुक होकर कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा, “मैं प्रदीप को वापस तो नहीं ला सकता, लेकिन आपके किस काम आ सकता हूं?” उनके इस सवाल ने परिवार की पीड़ा और स्थिति की गंभीरता को सामने रखा।

सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान परिवार से घटना की पूरी जानकारी ली और यह समझने की कोशिश की कि किन परिस्थितियों में छात्र ने यह कदम उठाया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बेहद जरूरी है।

बातचीत के दौरान उन्होंने परिजनों से चार प्रमुख सवाल पूछे, जिनमें परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं, जांच की स्थिति और परिवार की अपेक्षाएं शामिल थीं। उन्होंने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या प्रशासन या किसी एजेंसी की ओर से अब तक उन्हें न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया है या नहीं।

परिजनों ने अपनी मांगें और पीड़ा राहुल गांधी के सामने रखीं। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद वे न्याय और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। परिजनों की बातें सुनने के बाद राहुल गांधी ने कहा, “ये तो हम कर सकते हैं,” जिससे संकेत मिला कि वे इस मामले को राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर उठाने का इरादा रखते हैं।

यह बातचीत ऐसे समय में सामने आई है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। हाल के वर्षों में कई बार पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे लाखों छात्रों और उनके परिवारों में असंतोष और चिंता का माहौल बना हुआ है।

इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं।

राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से कई मामलों में जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है।

फिलहाल यह मामला संवेदनशील बना हुआ है और इसे लेकर जांच तथा राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दोनों जारी हैं। वहीं, छात्र की मौत ने एक बार फिर देश में शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता की आवश्यकता को केंद्र में ला दिया है।