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सीकर में मानसून की बेरुखी, औसत बारिश भी नहीं हुई; उमस और गर्मी से लोग परेशान, फिलहाल राहत के आसार कम

 
सीकर में मानसून की बेरुखी, औसत बारिश भी नहीं हुई; उमस और गर्मी से लोग परेशान, फिलहाल राहत के आसार कम

राजस्थान के सीकर जिले में इस मानसून सीजन अब तक बारिश का आंकड़ा उम्मीद के मुताबिक नहीं पहुंच पाया है। जिले में औसत बारिश भी दर्ज नहीं हुई है, जिसके चलते किसानों से लेकर आम लोगों तक चिंता बढ़ गई है। बुधवार को सीकर जिले में हल्के बादल छाए रहे, लेकिन बारिश नहीं होने से गर्मी और उमस का असर बना हुआ है।

मौसम में नमी के बावजूद बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं बन पा रही हैं। दिनभर बादलों की आवाजाही देखने को मिल रही है, लेकिन बादल बिना बरसे ही निकल रहे हैं। उमस भरे मौसम के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरों और बाजारों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की ट्रफ लाइन वर्तमान में उत्तर प्रदेश और पूर्वी दिल्ली के ऊपर से गुजर रही है। इसका असर राजस्थान के मौसम पर भी पड़ रहा है, लेकिन प्रदेश में फिलहाल अच्छी बारिश के लिए मजबूत सिस्टम नहीं बन रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना कम बनी हुई है।

सीकर जैसे शेखावाटी क्षेत्र में मानसून की कमजोर गतिविधियों का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। बारिश की कमी के कारण खेतों में नमी बनाए रखना किसानों के लिए चुनौती बन रहा है। खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से किसान चिंतित हैं।

हालांकि, मानसून के दौरान समय-समय पर सक्रिय हुए सिस्टम से सीकर में कुछ जगहों पर बारिश दर्ज की गई है। जुलाई में मानसून सक्रिय होने पर जिले के कई इलाकों में अच्छी बारिश भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद पूरे सीजन का औसत आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है।

मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में बारिश की गतिविधियां पूरी तरह से मानसून सिस्टम की स्थिति पर निर्भर रहेंगी। यदि बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से कोई मजबूत सिस्टम बनता है तो राजस्थान के कई जिलों में बारिश की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल सीकर सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों को गर्मी और उमस से राहत के लिए बारिश का इंतजार करना पड़ेगा।

किसानों की नजरें अब आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी हुई हैं। अच्छी बारिश होने पर फसलों को फायदा मिल सकता है, लेकिन लगातार सूखे जैसे हालात बने रहे तो कृषि गतिविधियों पर इसका असर पड़ सकता है।