मकान मालिक पर 15 साल की नाबालिग से रेप का आरोप, किडनैप कर 3 दिन तक बंधक बनाने का दावा; जान से मारने की धमकी
एक 15 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म और उसे बंधक बनाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मकान मालिक ने नाबालिग को अगवा किया और करीब तीन दिन तक अपने कब्जे में रखा। इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
किडनैप कर ले जाने का आरोप
पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, नाबालिग को आरोपी कथित तौर पर बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। इसके बाद उसे ऐसी जगह रखा गया, जहां से वह आसानी से बाहर नहीं निकल सकती थी। परिवार को जब नाबालिग के लापता होने की जानकारी मिली तो उसकी तलाश शुरू की गई।
परिजनों के मुताबिक, करीब तीन दिन बाद नाबालिग वापस मिली। इसके बाद उसने परिवार को अपने साथ हुई पूरी घटना के बारे में बताया।
आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उसे बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। विरोध करने पर उसे डराया-धमकाया गया। आरोप है कि आरोपी ने पुलिस या परिवार को जानकारी देने पर जान से मारने की धमकी भी दी।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल परीक्षण कराया और उसके बयान दर्ज किए। ऐसे मामलों में जांच के दौरान पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों को महत्वपूर्ण माना जाता है।
POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई
नाबालिग की उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण मामले में पॉक्सो कानून के प्रावधान लागू होते हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
जांच टीम आरोपी की भूमिका, नाबालिग को ले जाने के घटनाक्रम और उसे तीन दिन तक कहां रखा गया था, इसकी जानकारी जुटा रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच कर सकती है।
धमकी देने के आरोप की भी जांच
परिजनों का आरोप है कि आरोपी ने नाबालिग को घटना के बारे में किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। पुलिस इस आरोप की भी जांच कर रही है। यदि जांच में धमकी और बंधक बनाए जाने के आरोपों की पुष्टि होती है तो आरोपी के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। नाबालिग से जुड़े मामलों में उसकी पहचान उजागर करना कानूनन प्रतिबंधित है, इसलिए पीड़िता की पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
