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खाटू मेले में श्रद्धालुओं की कमी, होटल और दुकानदार चिंतित

 
खाटू मेले में श्रद्धालुओं की कमी, होटल और दुकानदार चिंतित

प्रसिद्ध बाबा खाटूश्यामजी का मेला इस बार अपेक्षित भीड़ के मुकाबले कम श्रद्धालुओं के साथ शुरू हुआ है। रेस्ट हाउस संचालकों और दुकानदारों का कहना है कि होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में कमरे खाली हैं, जिससे स्थानीय व्यापार प्रभावित हुआ है।

खाटू मेले में हर साल लाखों भक्त बाबा खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए आते हैं। लेकिन इस बार आयोजकों और स्थानीय व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि श्रद्धालुओं की कमी से व्यापार में गिरावट देखने को मिल रही है। रेस्ट हाउस संचालकों का कहना है कि उन्होंने इस मेला के लिए कई तैयारियां की थीं, लेकिन अधिकतर कमरे खाली पड़े हैं।

स्थानीय दुकानदार भी खाटू में श्रद्धालुओं की कमी से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे फल, पूजा सामग्री, धार्मिक वस्तुएं और भोजन जैसी सेवाओं पर निर्भर करते हैं, लेकिन इस बार बिक्री सामान्य से काफी कम रही है।

हालांकि, प्रशासन और श्रीश्याम मंदिर कमेटी का दावा है कि मेले के छठे दिन यानी 26 फरवरी दोपहर तक लगभग 10 लाख 35 हजार भक्त खाटू में पहुंचे हैं। मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं के आगमन और व्यवस्थाओं को लेकर संतोष जाहिर किया है।

मंदिर प्रबंधन ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान रखा गया है। भीड़ कम होने के बावजूद मंदिर परिसर में सभी आवश्यक सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि मेले में भीड़ में कमी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे मौसम, यात्रा की कठिनाई या अन्य सामाजिक-आर्थिक कारक। उनका मानना है कि व्यापार और पर्यटन पर इसका असर कुछ समय के लिए महसूस किया जा सकता है।

स्थानीय व्यापारियों और रेस्ट हाउस संचालकों ने प्रशासन और मंदिर कमेटी से अनुरोध किया है कि भविष्य में अधिक प्रचार और सुविधाओं के जरिए श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने की पहल की जाए। इससे न केवल धार्मिक उत्सव का उत्साह बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कुल मिलाकर, खाटू मेले में श्रद्धालुओं की कमी ने होटल, गेस्ट हाउस और दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं प्रशासन और मंदिर कमेटी का दावा है कि भक्तों की संख्या लाखों में पहुंची है। आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि मेला पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न होता है या नहीं, और इससे स्थानीय व्यापार पर क्या असर पड़ता है।