सीकर में जितेंद्रानंद सरस्वती का संबोधन, सनातन संस्कृति और राजस्थान की परंपराओं पर दिया जोर
सीकर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जितेंद्रानंद सरस्वती ने संबोधित करते हुए राजस्थान की सनातन संस्कृति और यहां के लोगों की परंपराओं की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने सदियों से सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए अनेक त्याग किए हैं, जिनकी मिसाल आज भी देखने को मिलती है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राजस्थान की धरती केवल वीरता और बलिदान के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यहां के लोगों ने संस्कृति, परंपरा और मानव सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विशेष रूप से पानी के महत्व को लेकर राजस्थानियों की समझ का उल्लेख किया और कहा कि रेगिस्तानी प्रदेश होने के कारण यहां के लोगों को जल की कीमत का गहरा ज्ञान है।
उन्होंने कहा कि इसी कारण आज भी देश और दुनिया में प्याऊ लगाने की परंपरा सबसे अधिक राजस्थानियों के बीच देखने को मिलती है। गर्मी और जल संकट वाले क्षेत्रों में राहगीरों के लिए निशुल्क पानी उपलब्ध कराने की यह परंपरा राजस्थान की सेवा भावना और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाती है।
जितेंद्रानंद सरस्वती ने आगे कहा कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर क्षेत्र में सर्वकल्याण की भावना को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि यह भावना समाज को जोड़ने और मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देती है, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान के लोगों ने हमेशा संकट के समय में एक-दूसरे की मदद की है और यह सहयोगात्मक संस्कृति आज भी जीवंत है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को समझें और उन्हें आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। संबोधन के दौरान लोगों ने कई बार तालियों के साथ उनके विचारों का समर्थन किया। आयोजन स्थल पर धार्मिक माहौल के साथ-साथ सांस्कृतिक एकता और सेवा भावना का संदेश भी प्रमुख रूप से देखने को मिला।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि समाज में सद्भाव, सेवा और परंपराओं के संरक्षण से ही एक सशक्त और संस्कारित समाज का निर्माण संभव है।
