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सीकर में इंद्रेश उपाध्याय बोले- चारों वेदों का फल भागवत कथा, पूर्व मंत्री बीडी कल्ला भी पहुंचे

 
सीकर में इंद्रेश उपाध्याय बोले- चारों वेदों का फल भागवत कथा, पूर्व मंत्री बीडी कल्ला भी पहुंचे

सीकर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि चारों वेदों का फल श्रीमद्भागवत कथा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान की भक्ति के साथ अपने जीवन में सकारात्मक विचार और अच्छे आचरण को अपनाने की अपील की।

इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में ईर्ष्या से बचना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति की तरक्की, सुख या सफलता देखकर मन में द्वेष रखने के बजाय उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईर्ष्या इंसान के मन को अशांत करती है और व्यक्ति को नकारात्मक विचारों की ओर ले जाती है। इसके विपरीत प्रेम, सद्भाव और भक्ति का भाव जीवन को बेहतर बनाने में मदद करता है।

कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और भगवान की लीलाओं तथा श्रीमद्भागवत के प्रसंगों को ध्यानपूर्वक सुना। कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से जीवन में धर्म और संस्कारों के महत्व को समझाया गया।

इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह मनुष्य को जीवन जीने की दिशा भी देती है। इसके प्रसंगों से व्यक्ति को सत्य, संयम, सेवा, प्रेम और सद्भाव जैसे मूल्यों की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने व्यवहार में विनम्रता रखनी चाहिए और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखना चाहिए।

कार्यक्रम में राजस्थान के पूर्व मंत्री बीडी कल्ला भी पहुंचे। उन्होंने कथा स्थल पर पहुंचकर धार्मिक आयोजन में सहभागिता की। इस दौरान आयोजकों और श्रद्धालुओं की ओर से उनका स्वागत किया गया। कथा आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह देखने को मिला।

कथा के दौरान वक्ता ने श्रद्धालुओं को आपसी भाईचारे और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जरूरी है कि लोग एक-दूसरे के प्रति सहयोग और सम्मान की भावना रखें। धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि उससे मिलने वाली सीख को अपने व्यवहार और जीवन में उतारना भी होना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया और धार्मिक वातावरण में भक्ति भाव के साथ आयोजन में हिस्सा लिया। आयोजकों के अनुसार कथा के दौरान आने वाले दिनों में भी विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।