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सीकर सभापति चुनाव से पहले कांग्रेस-भाजपा में क्रॉस वोटिंग का डर, डोटासरा के बयान से बढ़ी हलचल

 
सीकर सभापति चुनाव से पहले कांग्रेस-भाजपा में क्रॉस वोटिंग का डर, डोटासरा के बयान से बढ़ी हलचल

सीकर में सभापति पद के लिए 21 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों को क्रॉस वोटिंग की आशंका सता रही है। इसी को देखते हुए दोनों पार्टियों ने अपने-अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी और कड़ी कर दी है। मतदान से पहले पार्षदों को एकजुट रखने और राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

मतदान से पहले बढ़ी दोनों दलों की चिंता

सभापति पद के चुनाव में एक-एक वोट महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा अपने पार्षदों के साथ-साथ संभावित समर्थकों को लेकर भी सतर्क हैं। दोनों दलों को आशंका है कि मतदान के दौरान कुछ पार्षद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय दूसरे उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर सकते हैं।

क्रॉस वोटिंग की संभावना को देखते हुए दोनों दलों ने अपने पार्षदों की बाड़ाबंदी को मजबूत किया है। पार्षदों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और उन्हें एकजुट रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

21 सितंबर को होना है मतदान

सीकर सभापति पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है। इससे पहले राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष में समर्थन जुटाने में लगे हैं। चुनाव में निर्दलीय और अन्य पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में दोनों प्रमुख दलों की नजर संभावित समर्थकों पर बनी हुई है।

नामांकन और चुनावी प्रक्रिया के बाद अब सभी की नजर मतदान के दिन होने वाले घटनाक्रम पर है। अंतिम समय तक पार्षदों के समर्थन को लेकर समीकरण बदलने की संभावना से दोनों दल सतर्क हैं।

डोटासरा ने दिया बड़ा बयान

इसी बीच राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सीकर सभापति चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। डोटासरा के बयान के बाद चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

हालांकि, सभापति चुनाव में अंतिम तस्वीर 21 सितंबर को मतदान के बाद ही स्पष्ट होगी। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने पार्षदों को साथ रखने और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मतदान पर टिकी सभी की नजर

सीकर सभापति चुनाव अब प्रतिष्ठा का मुद्दा बनता जा रहा है। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच दोनों दलों की बाड़ाबंदी और रणनीति पर नजर है। वहीं, डोटासरा के बयान के बाद कांग्रेस की रणनीति को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदान के दिन कांग्रेस और भाजपा अपने पार्षदों को एकजुट रखने में कितनी सफल होती हैं और सभापति पद का चुनाव किस तरह के राजनीतिक समीकरण के बीच संपन्न होता है।