खाटूश्यामजी मंदिर में 19 घंटे बंद रहेंगे दर्शन, 13 अगस्त रात 10 बजे से पट होंगे बंद; 14 अगस्त को होगा बाबा श्याम का तिलक
राजस्थान के सीकर जिले में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। बाबा श्याम की विशेष सेवा पूजा और तिलक श्रृंगार के चलते मंदिर के पट करीब 19 घंटे तक आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। मंदिर से जुड़ी ऐसी व्यवस्थाएं विशेष पूजा और तिलक के अवसर पर पहले भी की जाती रही हैं।
जानकारी के अनुसार, 13 अगस्त 2026 की रात 10 बजे से खाटूश्यामजी मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद अगले दिन बाबा श्याम की विशेष सेवा पूजा और तिलक श्रृंगार किया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर बाबा के दर्शन नहीं कर सकेंगे।
14 अगस्त को होगा विशेष तिलक श्रृंगार
मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान के तहत बाबा श्याम का तिलक श्रृंगार किया जाएगा। तिलक श्रृंगार के दौरान मंदिर की नियमित दर्शन व्यवस्था प्रभावित रहती है। पूर्व में भी विशेष सेवा पूजा और तिलक के चलते मंदिर के पट रात 10 बजे से अगले दिन शाम 5 बजे तक बंद रखे गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस अवधि में मंदिर के अंदर बाबा श्याम की विशेष पूजा-अर्चना और श्रृंगार की धार्मिक परंपराएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन व्यवस्था दोबारा शुरू होगी।
दर्शन के लिए जाने वाले भक्त ध्यान रखें
खाटूश्यामजी मंदिर राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां सालभर बड़ी संख्या में भक्त बाबा श्याम के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में 13 और 14 अगस्त को खाटूधाम जाने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर बंद रहने की जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।
मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की जाती है कि वे पट बंद रहने की अवधि में खाटूश्यामजी की यात्रा की योजना न बनाएं और दर्शन व्यवस्था सामान्य होने के बाद ही मंदिर पहुंचें। विशेष अवसरों पर मंदिर में दर्शन बंद किए जाने की सूचना पहले भी जारी की जाती रही है।
19 घंटे तक नहीं मिलेंगे बाबा के दर्शन
यदि 13 अगस्त रात 10 बजे से अगले दिन शाम 5 बजे तक की अवधि मानी जाए तो श्रद्धालुओं को करीब 19 घंटे तक बाबा श्याम के दर्शन नहीं मिलेंगे। इसके बाद मंदिर के पट खुलने पर सामान्य दर्शन व्यवस्था बहाल की जाएगी।
इसलिए बाहर से आने वाले भक्तों को सलाह है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मंदिर की ताजा सूचना और दर्शन व्यवस्था की पुष्टि जरूर कर लें। विशेष पूजा और तिलक श्रृंगार के चलते होने वाला यह बदलाव धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
