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सीकर में रोहित गोदारा गैंग से जुड़े आरोपी को कोर्ट ने किया बरी, लाखों के सोने की लूट मामले में सबूत नहीं हुए साबित

 
सीकर में रोहित गोदारा गैंग से जुड़े आरोपी को कोर्ट ने किया बरी, लाखों के सोने की लूट मामले में सबूत नहीं हुए साबित

सीकर में करीब पांच साल पुराने लाखों रुपये के सोने की लूट के मामले में अदालत ने आरोपी कमलदीप उर्फ कमल को बरी कर दिया है। आरोपी के कथित तौर पर रोहित गोदारा गैंग से जुड़े होने की बात सामने आई थी। एडीजे कोर्ट ने मामले में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर उसे दोषमुक्त करते हुए रिहा करने का आदेश दिया।

करीब 9 लाख रुपये के सोने की लूट का था मामला

मामला करीब पांच साल पुराना बताया जा रहा है। शिकायत के अनुसार, वारदात में लाखों रुपये कीमत के सोने के आभूषण लूटे गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लूटे गए सोने की कीमत करीब 9 लाख रुपये बताई गई थी। पुलिस जांच के दौरान कमलदीप उर्फ कमल का नाम सामने आया और उसे इस मामले में आरोपी बनाया गया।

कोर्ट में पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकी पुलिस

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर पाया। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान महत्वपूर्ण माने जा रहे सीसीटीवी फुटेज को अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका। इसके अलावा आरोपी की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर भी जांच में खामियां सामने आईं।

सबूतों के अभाव में आरोपी को किया दोषमुक्त

एडीजे कोर्ट संख्या-2 की न्यायाधीश डॉ. वीनू नागपाल ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। अदालत के अनुसार, आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और भरोसेमंद साक्ष्य नहीं होने के कारण आरोपी को दोषमुक्त किया गया। इसके बाद उसे रिहा करने का आदेश दिया गया।

जांच में सामने आई कमियों पर भी चर्चा

फैसले के बाद मामले की पुलिस जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खास तौर पर सीसीटीवी जैसे संभावित महत्वपूर्ण साक्ष्य अदालत में पेश नहीं किए जाने और पहचान प्रक्रिया से जुड़ी कथित कमियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अदालत का फैसला आरोपी के खिलाफ आरोप साबित न होने के आधार पर है। आरोपी को बरी किया जाना यह दर्शाता है कि अभियोजन पक्ष उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं कर सका।

फिलहाल अदालत के फैसले के बाद कमलदीप उर्फ कमल को इस मामले में दोषमुक्त कर दिया गया है। यह मामला पुलिस जांच में साक्ष्य जुटाने और उन्हें न्यायालय के समक्ष उचित प्रक्रिया के तहत पेश करने की अहमियत को भी सामने लाता है।