आठवीं पास किसान के खेती के नवाचार देख कृषि वैज्ञानिक भी हैरान, प्राकृतिक खेती से मशरूम उत्पादन तक बनाई अलग पहचान
राजस्थान के सीकर जिले के एक किसान ने अपनी मेहनत और सीखने की लगन से खेती को नई दिशा दी है। जिले के किसान संजय यादव भले ही केवल आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं, लेकिन खेती में उनके प्रयोग और नवाचार देखकर कृषि वैज्ञानिक भी हैरान हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती तक सीमित रहने के बजाय आधुनिक तकनीकों को अपनाया और अलग-अलग कृषि गतिविधियों में प्रशिक्षण लेकर अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में काम किया।
संजय यादव ने सबसे पहले प्राकृतिक खेती और मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने खेती की नई तकनीकों और कम लागत में बेहतर उत्पादन के तरीकों को समझा। इसके बाद उन्होंने सीखी हुई तकनीकों को अपने खेत पर प्रयोग के तौर पर अपनाना शुरू किया।
प्रशिक्षण लेकर बदला खेती का तरीका
संजय यादव का मानना है कि किसान यदि खेती से जुड़ी नई तकनीकों को सीखकर उनका सही तरीके से इस्तेमाल करें तो पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने कृषि विशेषज्ञों और प्रशिक्षण संस्थानों से जानकारी हासिल की।
प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण के बाद उन्होंने रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करने और खेती में प्राकृतिक तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में भी उन्हें मदद मिली।
इसके बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग ली। मशरूम की खेती के लिए कम जगह की जरूरत और बाजार में इसकी मांग को देखते हुए उन्होंने इसे आय के अतिरिक्त स्रोत के तौर पर अपनाया।
प्रयोग करने से नहीं घबराए
संजय यादव की खासियत यह है कि वह खेती में नए प्रयोग करने से पीछे नहीं हटते। आठवीं तक शिक्षा हासिल करने के बावजूद उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़ी नई जानकारी हासिल करने में रुचि दिखाई। वह कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से बातचीत कर खेती के नए तरीकों को समझते हैं और फिर उन्हें अपने खेत पर आजमाते हैं।
उनके नवाचारों की जानकारी जब कृषि विशेषज्ञों तक पहुंची तो उन्होंने भी किसान के प्रयासों की सराहना की। संजय का सफर यह बताता है कि खेती में सफलता के लिए केवल किताबी शिक्षा ही जरूरी नहीं, बल्कि सीखने की इच्छा और नई तकनीक अपनाने का साहस भी महत्वपूर्ण है।
दूसरे किसानों के लिए मिसाल
संजय यादव अब अपने अनुभवों के जरिए दूसरे किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि किसान खेती को केवल परंपरागत तरीके से करने के बजाय बाजार की मांग और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर नए विकल्प तलाशें।
प्राकृतिक खेती और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण लेकर उन्होंने यह साबित किया है कि सीमित औपचारिक शिक्षा के बावजूद सही जानकारी और मेहनत से कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया जा सकता है। सीकर के संजय यादव आज उन किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं, जो खेती में बदलाव और नवाचार के जरिए अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं।
