सीकर से गंगोत्री तक 1300 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा शुरू, 20 शिवभक्त एक महीने बाद लाएंगे गंगाजल
श्रावण मास के पावन अवसर पर सीकर से गंगोत्री तक की ऐतिहासिक कांवड़ पदयात्रा रविवार को शुरू हुई। सीकर के राधाकिशनपुरा स्थित मोदी कोठी से 16वीं कांवड़ यात्रा को विधि-विधान के साथ रवाना किया गया। इस यात्रा में शामिल 20 शिवभक्त करीब 1300 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर एक महीने बाद गंगोत्री से गंगाजल लेकर सीकर लौटेंगे।कांवड़ यात्रा की शुरुआत से पहले शिवभक्तों ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की और यात्रा की सफलता के लिए प्रार्थना की। इसके बाद हर-हर महादेव के जयकारों के बीच कांवड़ियों का जत्था गंगोत्री धाम के लिए रवाना हुआ।
एक महीने तक चलेगी पैदल यात्रा
यात्रा में शामिल शिवभक्त लगातार पैदल चलते हुए गंगोत्री पहुंचेंगे। वहां से पवित्र गंगाजल लेकर वापस सीकर आएंगे और सावन महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। इस पूरी यात्रा में करीब एक महीने का समय लगने का अनुमान है।शिवभक्तों का कहना है कि भगवान शिव के प्रति आस्था और श्रद्धा ही उन्हें इतनी लंबी यात्रा करने की प्रेरणा देती है। कठिन रास्तों और मौसम की चुनौतियों के बावजूद वे हर साल इस धार्मिक यात्रा में शामिल होते हैं।
कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
श्रावण मास में देशभर में कांवड़ यात्राओं का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान लाखों शिवभक्त विभिन्न तीर्थ स्थलों से जल लेकर शिवालयों में अभिषेक करते हैं।सीकर से निकलने वाली यह कांवड़ यात्रा भी क्षेत्र में विशेष पहचान रखती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। यात्रा के दौरान शिवभक्त भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते हैं।
आस्था और भक्ति का अनोखा संगम
1300 किलोमीटर लंबी यह पैदल यात्रा शिवभक्तों के लिए सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और संकल्प का प्रतीक है। कांवड़ियों का कहना है कि भगवान शिव की कृपा से वे इस कठिन यात्रा को पूरा करते हैं।सीकर से रवाना हुए शिवभक्त अब गंगोत्री की ओर बढ़ चुके हैं। करीब एक महीने बाद गंगाजल लेकर लौटने पर वे शिवालयों में जलाभिषेक करेंगे और अपनी धार्मिक परंपरा को पूरा करेंगे।
